फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष और महिला अस्पताल की व्यवस्थाएं नहीं सुधर पा रही हैं। सोमवार रात तीन नवजातों को लेकर पहुंचे परिजन ढाई घंटे तक इमरजेंसी और एसएनसीयू वार्ड के चक्कर लगाते रहे। आखिर में डीएम के निर्देश पर एसीएमओ ने नवजातों को अस्पताल में भर्ती करवाया। हालत गंभीर होने पर उन्हें रात दो बजे रेफर कर दिया गया।
मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव नानकार नगला निवासी बलवीर यादव की पत्नी विनीता देवी (35) ने सोमवार दोपहर को एक निजी अस्पताल में दो बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया। रात करीब 11 बजे बच्चों की हालत बिगड़ी। साढ़े 11 बजे बच्चों के मामा वीरपाल, मामी सीमा, मौसी अंजू व रीना तीनों को लेकर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे।
वीरपाल ने बताया कि वहां डॉक्टर ने नवजात होने के कारण एसएनसीयू वार्ड ले जाने के लिए कहा। परिजन एसएनसीयू ले गए, मगर वहां के स्टाफ ने भर्ती करने से इन्कार कर दिया। वे नवजातों को लेकर फिर इमरजेंसी कक्ष में पहुंचे। वहां इलाज संभव न होने से डॉक्टर ने फिर एसएनसीयू भेजा, मगर दोबारा भी निराशा हाथ लगी। इस पर वह फिर इमरजेंसी कक्ष पहुंच गए।
परेशान परिजनों ने डीएम संजय कुमार सिंह को रात में ही फोन पर जानकारी दी। डीएम ने एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम को मामले को देखने के निर्देश दिए। एसीएमओ ने रात करीब दो बजे वीरपाल को फोन करके एसएनसीयू वार्ड के कर्मचारियों से बात कराने के लिए कहा।
इस पर सभी परिजन बच्चों को लेकर एसएनसीयू वार्ड पहुंचे। एसीएमओ की फटकार के बाद नवजातों को भर्ती किया गया और रात करीब सवा दो बजे एंबुलेंस से सैफई भेजा गया।
एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि सूचना के तुरंत बाद बच्चों को उचित इलाज के लिए एंबुलेंस से हायर सेंटर भेजा गया है। एसएनसीयू में हुई देरी के लिए जिम्मेदारों से जवाब मांगा जाएगा।