फर्रुखाबाद। जिले में बढ़ रहे बुखार के मरीजों में डेंगू की पुष्टि के लिए अब लोहिया अस्पताल की बीएसएल-2 लैब में एलाइजा जांच शुरू कर दी गई है। डेंगू मरीजों के लिए सभी अस्पताल में 65 बेड आरक्षित किए गए हैं। इसके बावजूद अभी सीबीसी जांच के इंतजाम नहीं हो सके हैं।
जनपद में बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे लोहिया अस्पताल से लेकर सीएचसी की ओपीडी में मरीजों की भीड़ लग गई है। इन दिनों बुखार के मरीजों की सीबीसी जांच में प्लेटलेट्स भी कम निकल रहे हैं। इससे निजी अस्पतालों के डॉक्टर व झोलाछाप डेंगू बताकर मरीजों से इलाज के नाम मनमाने रुपये ऐंठ रहे हैं। अभी तक डेंगू की पुष्टि के लिए कन्नौज के तिर्वा मेडिकल कालेज में नमूने भेजकर एलाइजा जांच कराई जा रही थी। अब लोहिया अस्पताल की बीएसएल-2 लैब में एलाइजा जांच शुरू कर दी गई है। इससे जांच रिपोर्ट भी उसी दिन या दूसरे दिन मिलने से मरीजों काे उपचार भी उसी हिसाब से मिल सकेगा।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि डेंगू के मरीजों के इलाज के लिए लोहिया अस्पताल में 20 व फतेहगढ़ सीएचसी में 10 बेड मच्छरदानी सहित आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा सीएचसी बरौन, कमालगंज, मोहम्मदाबाद, राजेपुर, नवाबगंज, शमसाबाद व कायमगंज में पांच-पांच बेड आरक्षित कर लिए गए हैं।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुुमार ने लोहिया अस्पताल महिला-पुरुष, सिविल अस्पताल लिंजीगंज व सभी सीएचसी प्रभारियों को आदेश जारी किया है। इसमें कहा कि ओपीडी में आने वाले बुखार के मरीजों की डेंगू किट से जांच की जाए। जांच में धनात्मक आने पर उनकी एलाइजा जांच के लिए नमूना लेकर लोहिया अस्पताल की बीएसएल-2 लैब भेजे जाएं। एलाइजा जांच में पुष्टि होने पर संबंधित क्षेत्र में निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। वहां स्वास्थ्य शिविर लगाने के साथ लार्वा नाशक छिड़काव आदि कराया जाए।
बीएसएल-2 में गंदगी व डेंगू वार्ड मिला बंद
डेंगू से निपटने के लिए भले ही मजबूत इंतजाम के दावे किए जा रहे हैं। हकीकत यह है कि लोहिया अस्पताल की बीएसएल-2 लैब में गंदगी की भरमार है। जगह-जगह केमिकल फैला होने के साथ बायोवेस्ट भी पड़ा रहता है। वहीं डेंगू मरीजों के लिए आरक्षित किए गए वार्ड में ताला जड़ा रहता है।
रीजेंट न होने से सीबीसी जांच ठप
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सीबीसी जांच के लिए मशीनें लगी हैं। इन दिनों बुखार का प्रकोप बढ़ने के साथ डेंगू के मरीज भी निकल रहे हैं। विभागीय लापरवाही के चलते किसी भी सीएचसी पर रीजेंट न होने से सीबीसी जांच ठप है। इससे मरीज निजी पैथोलॉजी पर जांच कराने को मजबूर हैं। पैथोलॉजी संचालक 250 रुपये से लेकर 500 रुपये तक वसूल रहे हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि एक-दो दिन में रीजेंट आ जाएगा। इसी के बाद सभी सीएचसी में सीबीसी जांच शुरू करा दी जाएगी। डेंगू वार्ड खुले रखने और मरीज आने पर तत्काल भर्ती कर इलाज शुरू करने के निर्देश दिए हैं। दवाओं की कोई कमी नहीं है। छोटी-मोटी कमियों को भी दूर कराया जाएगा।