फर्रुखाबाद। ईद-उल-अजहा यानी बकरीद 29 जून को मनाई जाएगी। मुस्लिम समाज के लोग कुर्बानी के लिए बकरों को घरों में बच्चों की तरह पाल रहे हैं। उलमा में सभी से खुले में कुर्बानी ना करने की अपील की। कहा कि ऐसा कोई काम न करें जिससे किसी को भी परेशानी हो। घरों में पल रहे बकरों को दाना खिला रहे हैं। अन्य मनपसंद चीजें भी खिलाई जा रही हैं। बकरों को ठंडी हवा में रखा गया है। कहा जाता है कि जितना जानवर खुश होगा उतना ही अधिक शबाब मिलेगा।
शहर काजी सैयद मुताहिर अली ने कहा कि बकरीद पर होने वाली कुर्बानी खुले में न करें। ताकि किसी अन्य वर्ग के लोगों को दिक्कत का सामना न करना पड़े। कुर्बानी के बाद जानवरों का बचा अंश गड्ढा कर उसमें दबा दें। कहीं भी पड़ा दिखाई नहीं देना चाहिए। प्रशासन के आदेश का पालन करना है।
शिया धर्मगुरु मौलाना सदाकत हुसैन संथली ने कहा कि इस पर्व पर नमाज के बाद मुस्लिम समाज के लोग अल्लाह की राह में जानवरों की कुर्बानी पेश करते हैं। यह कुर्बानी अल्लाह के लिए है, लिहाजा किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। वीडियो या फोटो भी सोशल मीडिया पर न डालें। भाईचारा हर हाल में कायम रखना है। दूसरे मजहब को ठेस पहुंचाना सबसे बड़ा गुनाह है।
ईद-उल-अजहा 29 जून को मनाई जाएगी। इसको देखते हुए बुधवार को जानवरों का बाजार नेकपुर खुर्द के पास लगेगा। मुस्लिम समाज के लोगों का मानना है कि ईद-उल-अजहा का यह जानवरों यानी बकरे का आखिरी बाजार है। इसमें मनचाहे रुपए मांगे जाएंगे। जिसको जरूरत होगी वह कुर्बानी के लिए बकरे खरीदेगा।