फर्रुखाबाद। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने वाले पशुपालकों का विवरण मांग दिया। इस पर सीवीओ चकरा गए। हकीकत यह है कि पशुपालकों के फोन करने के बावजूद उन्हें एंबुलेंस सेवा नहीं मिल पा रही है।
जनपद में पशुओं को आपातकालीन इलाज के लिए पशुधन विभाग से आउटसोर्स पर 6 एंबुलेंस संचालित हैं। इन पर चालक के साथ ही पशु चिकित्सक व पैरावेट की तैनाती है। एंबुलेंस सेवा चालू हुए दो माह भी नहीं हुए और मनमानी हावी हो गई। पेशुपालक जब टोलफ्री नंबर 1962 पर फोन कर एंबुलेंस बुलाते हैं, तो उन्हें यह सुविधा नहीं मिलती। पशुपालकों की समस्या को उभारते हुए अमर उजाला ने गुरुवार के अंक में ‘पशु पालकों को एंबुलेंस सेवा का नहीं मिल रहा लाभ’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इसका उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने संज्ञान लिया। उन्होंने विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से पूछताछ की। सीवीओ ने बताया कि छह एम्बुलेंस मिली हैं, इनमें पांच चल रही हैं।
उपमुख्यमंत्री ने पूछा कि एक एंबुलेंस प्रतिदिन कितने पशुओं का उपचार कर ही है। इस पर सीवीओ ने कहा कि 20 पशुओं का। इस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पशुओं का इलाज किया गया है, उन पशुपालकों का भौतिक सत्यापन कराकर प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएं। विभागीय रिकार्ड के अनुसार 21 अप्रैल से 20 मई तक आपातकालीन सेवा में 129 पशुओं का उपचार दिखाया गया है। इस हिसाब से जिले में औसतन चार पशुपालकों को ही एंबुलेंस का लाभ मिल सका है। जबकि विभाग के पास पशुपालकों का कोई रिकार्ड ही नहीं है। इसके अलावा रिकार्ड में 248 कैंप लगाकर 293 गांव के 2379 पशु देखने की बात कही गई। लेकिन हकीकत कुछ और है। इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.नीरज कुमार गौतम ने बताया कि एंबुलेंस के कैंप प्रभारी से पशुपालकों का विवरण मांगा जाएगा। अभी संख्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराई है।