कायमगंज क्षेत्र के नरसिंहपुर गांव में चौकीदार के बेटे की गोली मार कर
हत्या करने के पीछे प्रमुख कारण बिके मकान का बयाना है। बयाना लौटाने को
लेकर ही विवाद की शुरुआत हुई और नतीजा यह रहा कि एक व्यक्ति की गोली मार कर
हत्या कर दी गई। पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों की
तलाश में दबिश दी, लेकिन देर शाम तक एक भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं
आ सका।
मालूम हो कि सोमवार रात नरसिंहपुर गांव निवासी चौकीदार रामसिंह
के बेटे देवेंद्र की पड़ोसी शेर सिंह व उसके बेटे आनंद, वेदराम व मोर सिंह
से विवाद हो गया था। देवेंद्र रात में अपनी ताई कंठश्री और भाई प्रदीप के
साथ शिकायत करने थाने जा रहा था कि रास्ते में हमलावरों ने उसे घेर लिया और
गोली मार दी। देवेंद्र की मौत के बाद हमलावर फरार हो गए। जांच
पड़ताल में
यह बात सामने आई है कि दोनों परिवारों के बीच नाली के पानी निकासी को लेकर
विवाद हुआ था। वहीं यह भी बात सामने आई है कि राम सिंह के भतीजे समरपाल
पुत्र नंदराम का मकान शेर सिंह ने खरीद लिया था। राम सिंह ने ग्रामीणों की
मदद से इसका बयाना वापस करा दिया था। इसके अलावा एक परिवार की महिला को
भगाने के मामले में
दोनों परिवारों के बीच विवाद चल रहा था। विवाद में शेर
सिंह ने समरपाल की मदद की। समरपाल मकान बेचकर राजेपुर थानाक्षेत्र के गांव
निमिया में जाकर रहने लगा था। तभी से दोनों परिवारों में रंजिश है। इसी के
चलते राम सिंह ने 25 फरवरी को चंद्र किशोर के दूसरे पुत्र रितेश के अपहरण
की कहानी गढ़कर शेर सिंह, समरपाल, इनके मामा रमसुख और
रिश्तेदार सोबरन
निवासी बरझाला के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज होने
के दो दिन बाद ही रितेश गुरसहायगंज कोतवाली पहुंच गया था। उसने खुद के
अपहर्ताओं के चंगुल से मुक्त होकर आने की जानकारी दी थी। इस मामले में
पुलिस ने 12 मार्च को एफआर लगा दी थी। एसएसआई मेघनाथ सिंह ने बताया कि शेर
सिंह हिस्ट्रीशीटर है।
उसका गांव में आतंक है। ग्रामीण दोनों भाइयों को
शेरा और मोरा कह कर बुलाते हैं। इनके आतंक को देखते हुए सीओ एके रावत ने
चौकीदार के घर पर सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए हैं। शेर सिंह के परिजन ताला
लगाकर फरार हो चुके हैं। फिर भी गांव में उनके खिलाफ बोलने को लोग तैयार
नहीं हैं। देर रात एसपी विजय यादव और एएसपी आरबी चौरसिया ने मौके पर जाकर
घटना की जानकारी ली थी।