हैलट अस्पताल के आईसीयू में भर्ती युवती की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मी।
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फर्रुखाबाद। कन्नौज के गांव मलिकपुर की रहने वाली चर्चित घायल युवती की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। वह अभी भी अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है। जीप से कूदने का कारण उसे जेल के बजाय पुलिस लाइन ले जाना बताया जा रहा है।
वर्ष 2012 से अमीर बनने के ख्वाब में सफेदपोशों, अधिकारियों के चंगुल में फंसी युवती एक बार इस दलदल में गई तो फिर बाहर नहीं निकल पाई। उसने लाचार होकर अपने जीवन को ही दांव पर लगा दिया। शोषण करने वालों से बदला लेने के लिए उसने न सिर्फ अपने कदम अपराध की दुनिया की ओर बढ़ा दिए बल्कि खुद गिरोह का सरगना बन गई।
अपने 35 साल के जीवन में उसने दर्जनों संगीन आपराधिक घटनाएं अंजाम दी। यही कारण है कि वह आसपास के जिलों में लेडी डॉन के रूप में विख्यात हो गई। मगर 30 अप्रैल को थानाध्यक्ष कमालगंज ने उसे फोन पर धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
उसकी गिरफ्तारी से लेकर न्यायालय पेशी और जेल भेजने में जिस तरह से जल्दबाजी की गई, उस पर यदि नजर डालें तो पुलिसिया कहानी में कई लोच नजर आते हैं। कमालगंज थानाध्यक्ष सालिगराम वर्मा के अनुसार शाम 4 बजकर 5 मिनट पर मीरा को गिरफ्तार किया गया और 6 बजे उसे हवालात में दाखिल किया गया।
रात 9.30 बजे उसे सत्र न्यायाधीश के यहां पेश किया गया। न्यायालय ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में 14 दिन की रिमांड पर जिला जेल में निरुद्ध करने के निर्देश दिए। 10.20 बजे उसको सरकारी जीप से पुलिस लाइन ले जाया गया।
उसने पुलिस लाइन जाने से मना किया लेकिन जब जीप नहीं रुकी तो वह कूद गई। लेडी डॉन के पिता का आरोप है कि उसकी बेटी को बेइंतहा सताया गया। पुलिस ने बसपा नेता से मिलकर उसकी बेटी को मौत के मुहाने पर खड़ा कर दिया।