फर्रुखाबाद/अमृतपुर। थाना क्षेत्र के गांव चपरा में सोमवार को पुरानी रंजिश को लेकर हमलावरों ने चारपाई पर सो रहे वृद्ध की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पत्नी ने चार आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने छापेमारी कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
थाना अमृतपुर के गांव चपरा निवासी विश्राम सिंह राजपूत (75) रविवार की रात अपने घर के बाहर चारपाई पर लेटा हुआ था। पास में ही दूसरी चरपाई पर पत्नी विटोली देवी सो रही थी। विटोली देवी के अनुसार, रात करीब 10 बजे गांव के ही बटेश्वर राजपूत अपने परिवार के अन्य लोगों के साथ विश्राम सिंह के पास पहुंच गए और उसके ऊपर फायर कर दिया।
गोली विश्राम के कंधे के पास जा लगी। फायर की आवाज सुनकर वह उठ गई। इस दौरान आरोपी वहां से भाग गए। उनके शोर मचाने पर भतीजा मोहित और परिवार समेत आसपास के लोग मौके पर आ गए। आनन-फानन में वृद्ध को लोहिया अस्पताल लाया गया, जहां मौजूद डॉक्टर मनोज कुमार रतमेले ने विश्राम को मृत घोषित कर दिया।
विटोली देवी की तहरीर पर पुलिस ने बटेश्वर और उनके परिवार के शिवपाल, रामपाल, उसके बेटे जयकरन के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसमें कहा गया कि पुरानी रंजिश को लेकर उसके पति की हत्या की गई है। पुलिस ने शव का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पकड़े गए चारों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस की मुखबिरी के शक में बढ़ी रंजिश
अमृतपुर। पुलिस की मुखबिरी करने से दोनों परिवार के बीच रंजिश चालू हो गई थी। इससे पहले मृतक के बेटे पर एक आरोपी के भाई की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा था। ग्रामीणों के अनुसार, गांव चपरा निवासी विश्राम राजपूत के बेटे रमेश चंद्र को करीब 13 साल पहले बटेश्वर के परिवार वालों ने पुलिस की मुखबिरी कर शस्त्र फैक्ट्री चलाने के आरोप में पकड़वा दिया था। इसमें रमेश चंद्र जेल चला गया था। इस घटना के बाद बटेश्वर के भाई देशराज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें रमेशचंद्र समेत अन्य लोगों को नामजद किया गया था। इन घटनाओं के बाद से दोनों परिवार के बीच रंजिश चली आ रही है। विश्राम के बेटे सुभाषचंद्र ने बताया कि करीब 18 साल पहले उसके ताऊ मुक्ताप्रसाद की हत्या कर दी गई थी। उसमें शिवपाल समेत उसके परिवार के अन्य लोगों को नाजमद किया गया था। सुभाषचंद्र ने बताया कि वह और उसके दोनों भाई रमेशचंद्र, रामकुमार काफी समय से दिल्ली में रहकर नौकरी करते हैं।