सीजेएम न्यायालय के आदेश को छिपाकर मोहम्मदाबाद कोतवाल ने हत्या के मुकदमे को गैर इरादतन हत्या में तब्दील कर दिया। केस डायरी में धारा 173 अंकित की गई लेकिन सक्षम पर्यवेक्षण अधिकारी से अवलोकन नहीं कराया गया। कोतवाल के इस कार्य पर कार्रवाई किए जाने के लिए सीजेएम ने निर्णय की प्रति पुलिस अधीक्षक और उप महानिरीक्षक कानपुर को भेजी है।
मोहम्मदाबाद के गांव तेरा में हुए हत्याकांड के आरोपी दीवान उर्फ नसरुद्दीन, ताशीन, इकराउद्दीन, अमरुद्दीन और हसमुद्दीन धारा 147,148,149,307, 302 में जेल में निरुद्ध है। आरोपियों की ओर से 17 अक्तूबर को धारा 147, 148, 149, 308, 304 आईपीसी में जमानत प्रार्थना पत्र दिया। इस पर थाने से आख्या मंगाई गई। विवेचक कोतवाल ने आख्या दी। विवेचक ने अदालत में प्रार्थना पत्र दिया कि मुकदमे को गैर इरादतन हत्या मेें तरमीम कर दिया गया है।
आरोपियों का तरमीम हुई धाराओं में रिमांड स्वीकार करने की याचना की। कोतवाल भीम सिंह जावला के प्रार्थना पत्र पर केस डायरी का अवलोकन किया गया। इसमें 28 सितंबर 2016 को रिमांड परिवर्तन किए जाने का प्रार्थना पत्र दिए जाने का उल्लेख था। इस प्रार्थना पत्र को न्यायालय ने 29 सितंबर को खारिज कर दिया था। कोर्ट के इस आदेश को केस डायरी में अंकित नहीं किया गया।
3 सितंबर को मजरूव रहमान व 5 सितंबर को पांच स्वतंत्र साक्षीगणों के बयान अंकित कर विवेचना समाप्त कर आरोप पत्र प्रेषित करने का केस डायरी में उल्लेख किया गया। 29 सितंबर के आदेश को छिपाकर कोतवाल ने जल्दबाजी में दो पर्चे काट कर धारा परिवर्तित का आरोप पत्र और केस डायरी अपने पास रख ली। कोतवाल के इस कार्य पर सीजेएम ने अपने आदेश में कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि विवेचक आरोपी को लाभ पहुंचाने पर आमादा है।
कोर्ट के आदेश को छिपाकर उनके द्वारा धारा 147, 148, 149, 307, 302 का पर्याप्त साक्ष्य होते हुए भी धारा में कमी कर 147, 148, 149, 304, 308 आईपीसी में आरोप पत्र विचरित किया गया। सीजेएम ने आरोपियों का रिमांड परिवर्तित करने का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। कोतवाल के इस कार्य पर कार्रवाई किए जाने के लिए सीजेएम ने आदेश की एक प्रति पुलिस अधीक्षक और उप महानिरीक्षक कानपुर को भेजी है।