त्वरित न्यायालय के न्यायाधीश जगदीश ने कोर्ट के आदेश की अवमानना में शहर
कोतवाल को 100-100 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने
पर पांच दिन के साधारण कारावास की सजा का प्रावधान किया। कोतवाल ने अदालत
में अर्थदंड की धनराशि जमा कर दी।
त्वरित न्यायालय में विचाराधीन
आपराधिक पुनरीक्षण विमला देवी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य, में
नरायनपुर निवासी उमाशंकर व इनकी पत्नी सरला को नोटिस जारी हुआ था। यह नोटिस
तामील के लिए अदालत से 13 जनवरी को पैरोकार को दिए गए थे। नोटिस तामील व
बिना तामील अदालत में पेश नहीं किए गए। इस पर कोतवाल को नोटिस जारी कर
अदालत मेें तलब किया गया।
कोतवाल ने सिपाही के माध्यम से स्पष्टीकरण अदालत
में दाखिल किया। इसमें कहा कि 19 सितंबर 2014 को नोटिस मिला था। यह 18
अक्तूबर 2014 को कोर्ट में लौटा दिया गया। इसके बाद कोई नोटिस नहीं मिला।
जबकि कोर्ट के रिकार्ड में पैरोकार को 13 जनवरी को नोटिस तामील का साक्ष्य
उपलब्ध है। इसी तरह आपराधिक पुनरीक्षण परवेज खां बनाम उत्तर प्रदेश सरकार व
अन्य में शहर कोतवाली के मोहल्ला वंगशपुरा निवासी इंतजार खां के खिलाफ
कोर्ट से नोटिस जारी हुआ थ। यह नोटिस भी 13 जनवरी को
पैरोकार को कोर्ट से
रिसीव कराए गए थे। इसमें भी शहर कोतवाल ने नोटिस प्राप्त नहीं होने का जवाब
दिया। इससे कोर्ट से जारी नोटिस गायब होने का मामला सामने आया। न्यायाधीश
ने शहर कोतवाल के खिलाफ अदालत में कोर्ट के आदेश की अवमानना का मुकदमा दर्ज
कर नोटिस जारी किया था। शहर कोतवाल आरपी यादव कोर्ट में उपस्थित हुए।
सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने
शहर कोतवाल को दोनों मुकदमे में दोषी करार
दिया। उनको 100-100 रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। अर्थदंड अदा
न करने पर पांच दिन के साधारण कारावास की सजा का प्रावधान किया। शहर
कोतवाल ने अर्थदंड की धनराशि कोर्ट में दाखिल की।