थाना जहानगंज के गांव अदमापुर में सोमवार रात पुलिस ने ग्रामीणों से जमकर मारपीट की। आरोपियों के न मिलने पर पुलिस ने घरों में तोड़फोड़ की और बाहर खड़े वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। आरोप है कि पुलिसवालों ने आठ साल की बच्ची को छत से नीचे फेंक दिया, जिससे उसका पैर टूट गया। थानाध्यक्ष प्रदीप यादव का कहना है कि जिन लोगों ने सोमवार को पुलिस पर पथराव करके घायल किया और सरकारी जीप, अन्य वाहनों में तोड़फोड़ की।
वह लोग अपने बचाव के लिए इस तरह की शिकायत दर्ज करा रहे हैं, जो एकदम निराधार है। पुलिस का कोई भी सिपाही या दरोगा गांव नहीं गया है। वहीं, ग्रामीणो द्वारा की गई तोड़फोड़ और पथराव में पुलिस ने 14 लोगों को नामजद और 40-50 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
गांव के नेकराम का कहना है कि सोमवार को मार्ग दुर्घटना में गांव का श्यामू घायल हो गया था। इस बात को लेकर गांववालों ने जाम लगाकर विरोध किया। इसमें पुलिस की गाड़ी और कई दुपहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। इस घटना से नाराज थाना जहानगंज की पुलिस रात करीब 11 बजे गांव पहुंची और उसने बाहर खड़े ट्रैक्टर को क्षतिग्रस्त कर दिया।
नरेंद्र का कहना है कि उसकी चारा मशीन और अक्षय के ट्रैक्टर की लाइटें तोड़ दीं। खूंटे पर बंधे जानवरों को पीटते हुए छोड़ दिया। अक्षय की मां पार्वती का कहना है कि संजीव कुमार की कार पुलिस और पीएसी ने तोड़ डाली। ब्रजरानी को सिपाहियों ने पीट दिया। रानी का कहना है कि वह अपनी चारपाई पर लेटी थी। उसकी चारपाई को पुलिस ने पलट दिया।
रामश्री के बेटे राजेश की पत्नी रानी और ब्रजेश की पत्नी डॉली के साथ गालीगलौज किया। गांव वालों का कहना है कि पुलिसवाले घंटों कहर बरपाते रहे। वह बचाव करने के लिए घर छोड़कर बाग की तरफ भाग गए। आरोप है कि रामकिशोर की पुत्री जीनू (8) को किसी जवान ने छत से नीचे फेंक दिया, जिससे उसका पैर टूट गया। लीलावती ने आरोप लगाया कि उसकी झुमकी व चेन पुलिसवालों ने तोड़ ली। कुछ महिलाओं ने इसकी शिकायत पुलिस कप्तान से दर्ज कराई है। वहीं कार्यवाहक पुलिस कप्तान आरबी चौरसिया ने बताया कि उनके पास कोई महिला शिकायत करने के लिए नहीं आई है और न ही ऐसी कोई घटना पुलिस ने की है।