कुछ विद्यालयों में रसोई के गैस चूल्हे जानबूझकर चोरी दिखा दिए गए। चूल्हा व सिलिंडर तत्कालीन प्रधान के घर पहुंच गया या फिर कुछ और खेल हो गया। जो भी हो, खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा। इन विद्यलयों में भोजन लकड़ी व कंडे पर बन रहा है।
अब मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने एमडीएम के चोरी दिखाए गए उपकरण वाले स्कूलों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। पूछा गया है कि यदि वास्तव में चोरी हुई तो एफआईआर क्यों नहीं कराई गई। एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
पिछले वर्षों में तीन चरण में जिले के परिषदीय विद्यालयों को एमडीएम बनवाने के लिए रसोई गैस सिलिंडर, चूल्हा, रेगुलेटर आदि उपलब्ध कराया गया था। इनमें से कई स्कूलों में गैस कनेक्शन का सामान चोरी हो जाने की रिपोर्ट बीएसए आफिस भेज दी गई।
यहां से शासन को सूचना भेजी गई। इसमें कहा गया कि इन स्कूलों में मिट्टी के चूल्हे पर कंडे व लकड़ी आदि से बच्चों का भोजन बन रहा है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक अब्दुल समद ने बीएसए को भेजे पत्र में जानकारी मांगी कि चोरी वाले स्कूलों में रसोई गैस कनेक्शन के लिए फिर से ग्रांट की मांग की जाती है।
चोरी के संबंध में क्या साक्ष्य हैं। वास्तव में चोरी हुई या उपकरण गायब कर दिए गए। कितने विद्यालयों में चोरी की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
मध्याह्न भोजन प्राधिकरण लखनऊ को जिले से 188 विद्यालयों में रसोई गैस सिलेंडर, चूल्हे आदि चोरी हो जाने की रिपोर्ट भेजी गई थी। इनमें से केवल 30 स्कूलों में चोरी की प्राथमिक सूचना रिपोर्ट ही दर्ज है।
जनपद में 1988 विद्यलयों में मध्याह्न भोजन योजना चल रही है। 2018 में 1047 स्कूलों में रसोई गैस कनेक्शन के लिए प्रति विद्यालय 4204 रुपये आए थे। सूची में गड़बड़ी पकड़ी गई तो डीएम की अनुमति से 11 जून 2018 को कई स्कूलों के नाम बदल गए।
वहीं मिड-डे-मील के प्रभारी खंड शीक्षा अधिकारी बेगीश गोयल ने बताया कि निदेशक का पत्र प्राप्त हुआ है। चोरी की सूचना देने वाले स्कूलों की जांच कराकर रिपोर्ट भेजी जाएगी।
स्कूलों के सिलिंडर-चूल्हे चोरी दिखा दिए, अब होगी जांच
जानबूझकर चोरी दिखाए जाने पर निदेशक सख्त, एफआईआर का ब्योरा मांगा