पूर्व प्रधान की शनिवार रात नलकूप के बरामदे में सोते वक्त गला रेतकर हत्या कर दी गई। लखनऊ में कई साल रहने के बाद वह हफ्तेभर पहले ही गांव लौटे थे और एक निजी स्कूल में पढ़ाते थे। मृतक के बैग से मिले बैंक पासबुक व आधार कार्ड के आधार पर पुलिस ने सुराग हाथ लगने का दावा किया है। पुलिस अवैध संबंधों की कहानी भी खंगाल रही। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव में गोशाला की भूमि को लेकर विवाद भी चल रहा था।
जहानगंज थाना क्षेत्र के गांव सरफुद्दीनपुर उर्फ मधवापुर में निवासी पूर्व प्रधान रामसेवक (58) बेऔलाद थे। करीब आठ साल पहले पत्नी की मौत के बाद वह लखनऊ में रहकर एक इंटर कालेज में पढ़ाने लगे थे।
कभी कभार गांव भी आते-जाते थे। ग्रामीणों ने बताया कि करीब तीन साल पहले उन्होंने गोशाला का निर्माण कराया था। गोशाला की जमीन लेकर गांव के कुछ लोगों से विवाद भी चल रहा था। करीब 15 दिन पहले रामसेवक गांव लौटे थे। गांव निवासी राजेश पुत्र रामानंद के नलकूप को रहने का ठिकाना बना रखा था। सुबह राजेश की सूचना पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मौका मुआयना किया।
मौके पर फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाड भी पहुंचा। पूर्व प्रधान के सिर व कंधे पर भी धारदार हथियार से हमले के निशान मिले हैं। पुलिस का कहना है कि रामसेवक का एक छोटा भाई श्यामबाबू दिल्ली में परिवार के साथ रहता है। ग्रामीणों को उसके बारे में जानकारी नहीं है।
वह गांव भी आता-जाता नहीं है। इन दिनों रामसेवक कन्नौज के छिबरामऊ स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ाते थे। सूचना पर एसप्री डा. अनिल मिश्र व सीओ मोहम्मदाबाद राजवीर सिंह ने भी मौका मुआयना किया। एसओ अंगद सिंह ने बताया कि नलकूप मालिक राजेश की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जल्द मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।
चारपाई पर जिस तरह से रामसेवक का शव पड़ा था। उससे लग रहा था कि सोते समय ही उसका किसी ने गला रेत दिया है। यदि वह जाग रहा होता तो वह बचने के लिए कोई संघर्ष करता था। पर घटनास्थल की स्थित से ऐसा कुछ नहीं लगा। उसकी चप्पलें भी चारपाई के नीचे रखी थीं।
नलकूप में ताला लगा था। उसका मोबाइल चारपाई पर ही पड़ा था। इससे साफ है कि बदमाश लूट के इरादे से नहीं आए थे। उसके मोबाइल से रात 11 बजे अंतिम काल की गई थी। इससे साफ है कि घटना इसके बाद हुई है। परिस्थितियों से साफ है कि हत्या उसी ने की जिसे यह मालूम था कि रामसेवक नलकूप पर अकेला रहता है। हत्या कर आसानी से वहां से निकला जा सकता है।
गांव सरफुद्दीनपुर उर्फ मधवापुर से कुछ ही दूरी पर राजेश का नलकूप है। पुलिस जब पहुंची तो नलकूप वाले कमरे में ताला लगा था। रामसेवक का शव चारपाई पर पड़ा था। पुलिस ने नलकूप की चाबी तलाशी पर मिली नहीं। इस पर राजेश ने घर से नलकूप की दूसरी चाबी मंगाई। तब नलकूप का ताला खोला गया। इसके बाद पुलिस ने नलकूप में छानबीन की।
प्रधान हरमेश ने बताया कि फरवरी में रामसेवक गांव आया था। तब उसने कहा था कि वह धर्म परिवर्तन कर रहा है। वह अपना नाम अब्दुल हसन रहमान रख रहा है। उसने प्रधान से नाम बदलवाने के लिए प्रार्थना पत्र प्रमाणित करने को कहा था। इस पर प्रधान ने प्रार्थना पत्र प्रमाणित कर दिया था। पर जो आधार कार्ड पुलिस को मिला है। उसमें उसका नाम रामसेवक ही लिखा है।
फर्रुखाबाद में पूर्व प्रधान की गला रेतकर हत्या
भूमि विवाद व अवैध संबंधों की कहानी खंगाल रही पुलिस
बैंक पास बुक से मिले महत्वपूर्ण सुराग, अज्ञात पर मुकदमा