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15.82 लाख के गबन में दो प्रधान व सचिवों का फंसना तय

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ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में फर्जी बिल लगाकर व अधूरे कार्यों का पूरा भुगतान लेकर सरकारी धन का गबन करने का मामला जांच में पकड़ा गया। जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच कमेटियों ने 15 लाख 82 हजार 100 रुपये का गबन किए जाने की रिपोर्ट सौंपी है।
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इसी के बाद डीपीआरओ ने ग्राम पंचायत राजारामपुर मेई व गदनपुर देवराजपुर के प्रधान व सचिवों को नोटिस जारी कर दिया है। ब्लाक कमालगंज की ग्राम पंचायत गदनपुर देवराजपुर निवासी अजब सिंह व निर्जेश कुमार ने 20 सितंबर 2018 को प्रधान वीकेश कुमार के खिलाफ शिकायत की थी।


इसमें वर्ष 2015 में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव जीतने, नाली, गलियों, पार्क, शौचालय व पंचायत सचिवालय का नवीन निर्माण कार्य दिखाकर सरकारी धन के गबन का आरोप लगाया था। इसके साथ ही सीसी सड़क निर्माण, स्टेशनरी खरीद, प्रशासनिक व्यय, पंचायतघर की मरम्मत, खड़ंजा मरम्मत कार्यों के धनराशि सहित फर्जी बिल वाउचर भी सौंपे गए।
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इस पर जिलाधिकारी मोनिका रानी ने मामले की जांच जिला समाज कल्याण अधिकारी, डीआरडीए के सहायक अभियंता को सौंपी। जांच टीम ने वर्ष 2016-17 में सात मदों से 9 लाख 17 हजार 945 रुपये व वर्ष 2017-18 में पांच कार्यों में दो लाख 51 हजार 983 रुपये के गबन का मामला पाया। उन्होंने कुल 11 लाख 69 हजार 928 रुपये का दुरुपयोग होने की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी।


मोहम्म्दाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत राजारामपुर मेई निवासी शैलेंद्र सिंह ने ग्राम प्रधान सुषमा देवी के खिलाफ विकास कार्यों में धांधली की शिकायत की थी। जिलाधिकारी ने डीडीओ, मोहम्मदाबाद के बीडीओ व पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता की जांच कमेटी गठित की।


जांच के दौरान नाली निर्माण, खड़ंजा, मनरेगा व प्रधानमंत्री आवास में चार लाख 12 हजार 172 रुपये प्रधान व सचिव द्वारा दुुरुपयोग किए जाने का मिला। कमेटी द्वारा की गई प्रथम दृष्टया जांच में दोनों ग्राम पंचायतों में 15 लाख 82 हजार 100 रुपये का दुरुपयोग मिलने पर जिलाधिकारी ने प्रधानों व सचिवों को नोटिस देकर 15 दिन में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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डीपीआरओ अमित त्यागी ने बताया कि दोनों प्रधान व सचिवों को नोटिस जारी कर दिया गया है। 15 दिन में संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।


15.82 लाख के गबन में दो प्रधानों व सचिवों को नोटिस

फर्जी बिल लगाने व अधूरे कामों का पूरा भुगतान कराने का मामला

टीम गठित कर कराई गई थी जांच, डीएम को रिपोर्ट सौंपी
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