अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। ग्राम पंचायत बर्राखेड़ा में गड्ढे को तालाब दिखाकर सुंदरीकरण के नाम पर 1.60 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाकर याचिका दायर की गई है। इसमें प्रधान, तत्कालीन पंचायत सचिव, मनरेगा अधिकारी व कर्मचारी को आरोपी बनाया गया। सीजेएम ने फतेहगढ़ कोतवाली से आख्या मांगी है।
फतेहगढ़ कोतवाली इलाके के गांव बर्राखेड़ा निवासी मनोज कुमार शुक्ला एडवोकेट ने विकास खंड राजेपुर की ग्राम पंचायत बर्राखेड़ा के प्रधान ब्रह्मानंद पुत्र रामचंद्र, तत्कालीन पंचायत सचिव गिरिंद वर्मा, मनरेगा अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में याचिका दायर की है। आरोप है कि ग्राम पंचायत के गांव भरहेपुर में 0.417 हेक्टेयर का तालाब है। इसके अलावा दूसरा तालाब राजस्व रिकार्ड में नहीं है। यह तालाब रामतीर्थ के घर के सामने है। प्रधान व सचिव ने वर्ष 2015-16 में फर्जी तरीके से एक तालाब लालाराम कुशवाहा के घर के सामने अभिलेखों में दिखा दिया।
इस जगह गांव के लोगों ने निजी कार्य के लिए मिट्टी खोद कर गड्ढा कर दिया था। इस गड्ढे के सुंदरीकरण के नाम पर 1,60,034 रुपये खर्च दिखाकर गबन कर लिया गया। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर की गई थी। एसडीएम अमृतपुर ने मामले की जांच की। जांच रिपोर्ट में गड्ढे को तालाब दिखाकर गोलमाल किए जाने की पुष्टि हुई। पैसा मनरेगा से खर्च किया गया था। जांच रिपोर्ट के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 7 अप्रैल 2018 व 16 अप्रैल 2018 को डीएम को कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया। इसके बाद भी इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई। सीजेएम ने फतेहगढ़ कोतवाली से इस प्रकरण में रिपोर्ट दर्ज होने के संबंध में आख्या तलब की है। अगली तारीख 8 अगस्त की लगाई गई है।