गर्भपात की धारा हटाने पर पुन: विवेचना के आदेश
फर्रुखाबाद। दहेज को लेकर प्रताड़ित करने की दर्ज की गई रिपोर्ट में जबरिया गर्भपात की धारा को विवेचना में निकालकर आरोप पत्र न्यायालय पेश किया गया। इसकी शिकायत पीड़िता ने एसपी से दर्ज कराई है। एसपी ने पुन: विवेचना करने के निर्देश दिए हैं।
फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला चूड़ी वाली गली के रहने वाले असगर अली की पुत्री खुशबू ने एसपी को शिकायती पत्र दिया है। पत्र के मुताबिक आरोप है कि उसकी शादी मोहल्ले के ही रईस के साथ हुई थी। शादी के बाद ससुरालीजनों ने 15 लाख रुपये दहेज में मांगे। रुपये न देने पर प्रताड़ित करने लगे। वह गर्भवती थी। धमकी दी कि यदि रुपये नहीं मिले तो उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को मार दिया जाएगा।
आरोप है कि 14 अगस्त 2015 को उसे मारपीट कमरे में बंद कर दिया गया। इस दौरान उसने अपनी मां को सूचना दी। तब ससुरालवालों ने उसे कानपुर के मधुराज हॉस्पिटल में भर्ती कराया। वहां इलाज के दौरान गर्भपात हो गया। 12 जनवरी 2017 को ससुराली के लोगों ने घर से निकाल दिया। 16 जनवरी को फिर यह लोग उसके मायके आए और गालीगलौज किया व मारपीट की। 7 फरवरी 2017 को महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। महिला थानाध्यक्ष ने गर्भ समापन की धारा को निकाल दिया। उसका पति रईस डॉक्टर है। विवेचक ने महत्वपूर्ण धारा को निकालकर उसके साथ अन्याय किया है। एसपी दयानंद मिश्र ने मामले की नए सिरे से विवेचना करने के आदेश दिए हैं।
पांच माह पहले महिला थाने में दर्ज हुई थी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो