फर्रुखाबाद। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तत्कालीन क्यूआरटी प्रभारी, फतेहगढ़ कोतवाली में तैनात रहे सात सिपाहियों की गिरफ्तारी के लिए गैर जनानती वारंट जारी किया है।
इन लोगों के खिलाफ अधिवक्ता ने वर्ष 2008 में परिवाद कोर्ट में दर्ज कराया था।
फतेहगढ़ के मोहल्ला बजाजा निवासी वकील शहजाद अली ने वर्ष 2008 में क्यूआरटी प्रभारी निरक्षक अशोक कुमार, फतेहगढ़ कोतवाली के सिपाही महाराज सिंह, विजेंद्र सिंह, छविराम सिंह, राजवीर सिंह, नीरज कुमार, घनश्याम सिंह, विनोद कुमार के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया था।
इसमें कहा था कि 21 जनवरी 2008 को भाई आमिर अली उर्फ मोंटी को प्रभारी निरीक्षक व पुलिस कर्मी मछली टोला स्थित पीसीओ से पकड़ कर ले गए।
थाने जाकर भाई के संबंध में पूछा तो पुलिस कर्मियों ने उससे भी अभद्रता की। 22 जनवरी को फर्जी मुठभेड़ में भाई की गिरफ्तारी दिखा दी।
25 मार्च 2008 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपियों को तलब किया था। आरोपियों ने तलब करने आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की।
इस पर आरोपियों को स्टे मिल गया। उच्च न्यायालय ने नौ जनवरी 2020 में स्टे को निरस्त कर दिया था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।