फर्रुखाबाद। सुनील पत्नी की मौत के बाद से डिप्रेशन में रहता था। उसके शव के पास मिले डेढ़ पेज के सुसाइड नोट में पत्नी के लिए लिखा है कि प्रीती ने जीना सिखाया, अब उसके बिना कैसे रहूं। बेटियों को किसके सहारे छोड़ दूं, इसलिए वह दोनों बच्चों के साथ आत्महत्या कर रहा है। आई मिस यू प्रीती।
लिखा है कि फर्रुखाबाद या भोगांव का परिवार किसी का कोई दबाव नहीं है। जो काम करने जा रहा है, उससे काफी शर्मशार है।
दोनों परिवार सहयोग बनाए रखना। अपनी पत्नी प्रीती के बिना नहीं रह पा रहा हूं। आज वह नहीं है, तो मेरे जीवन में कुछ नहीं है। प्रीती ने अपना जीवन मेरे लिए समर्पित कर दिया था।
प्रीती की ही देन थी कि उसने गांव के लड़के का जीवन बदल दिया। आगे लिखा कि अगले जन्म में आऊंगा, तो ऐसा नसीब नहीं लेकर आऊंगा। जन्म हुआ, तो मां नहीं। शादी हुई, तो पत्नी नहीं। मेरा और बेटियों का पोस्टमार्टम न कराएं।
सुनील मैनपुरी के भोगांव निवासी अजय पाल का पुत्र था। जन्म के दूसरे ही दिन मां अतरश्री की मौत हो गई थी। अजय पाल के एटा जिले के नयागांव थाने के सराय अगहत निवासी साले रामनाथ के पुत्र नहीं था। इसलिए रामनाथ और उनकी पत्नी राजेश्वरी ने सुनील को गोद लिया था।
करीब आठ साल बाद रामनाथ के पुत्र शिवम ने जन्म लिया। रामनाथ ने दोनों बच्चों को अपनी संपत्ति भी बराबर बांट दी थी। दोनों भाइयों में काफी प्यार था और एक ही मकान में सभी रहते थे।
सुनील की ससुराल लखनऊ के मोहनलालगंज में थी। 25 जून को वहां करंट से उसकी पत्नी की मौत हो गई थी। 26 जून को यहां शव आया था।
तब से सुनील काफी परेशान रहता था। माना जा रहा है कि 26 तारीख को लेकर भी सुनाल तनाव में रहता था, इसलिए उसने घटना के लिए भी 26 तारीख की चुनी।
सुनील ने कोचिंग पढ़ने आने वाले बच्चों को शुक्रवार की छुट्टी मैसेज गुरुवार को ही कर दिया था। कुछ बच्चों ने मैसेज नहीं देखा, वही सुबह कोचिंग पढ़ने घर पहुंच गए थे।