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वकील की हत्या में दो भाई दोषी करार

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फर्रुखाबाद। विशेष अदालत ईसीएक्ट के न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह ने 18 वर्ष पूर्व वकील की हत्या कर चेन व रुपये लूटने के मामले में दो चचेरे भाइयों को दोषी करार दिया है।
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दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है। 29 अगस्त को उन्हें सजा सुनाई जाएगी। इसी मुकदमे के तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया है। मामले में वादी ही मुख्य हत्यारोपी निकला था।
शहर कोतवाली के मोहल बजरिया जाफर निवासी अधिवक्ता अरुण कुमार मिश्रा की मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव अमरौली के नजदीक 21 फरवरी 2008 को गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।
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उनसे चेन, 8500 रुपये और मोबाइल फोन भी लूट लिया गया था। इसकी रिपोर्ट बजरिया मोहल्ला रहने वाले रामऔतार ने मेरापुर थाने में अज्ञात बदमाशें के खिलाफ दर्ज कराई थी।
इसमें कहा कि वह अपने चचेरे भाई और दोस्त वकील अरुण कुमार मिश्रा को लेकर बाइक से एटा के अलीगंज क्षेत्र में दावत खाने गए थे।
वहां से लौटते समय रात करीब साढ़े आठ बजे अमरौली गांव के पास पांच बदमाशों ने रोक लिया और लाठी-डंडों से हमला बोल दिया।
इससे तीनों लोग बाइक से गिर गए। इसी दौरान एक बदमाश ने अरुण के गोली मार दी और रुपये, चेन व मोबाइल लूट ले गए।
पुलिस की जांच में रामऔतार, उसके चचेरे भाई दिलीप उर्फ नन्हे व तीन अन्य साथी ही हत्या के आरोपी पाए गए। पुलिस ने रामऔतार, दिलीप उर्फ नन्हे, एटा के नया गांव निवासी नरसिंह, झब्बू सिंह का नगला गांव निवासी सर्वेश और मेरापुर के गांव नौली निवासी विनोद यादव के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार पांडेय ने दलीले पेश की।
सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने आरोपी नरसिंह, सर्वेश और विनोद यादव को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। रामऔतार और उसके चचेरे भाई दिलीप उर्फ नन्हे को वकील की हत्या में दोषी करार दिया है।
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