एप से भेजी गई खबर) फोटो- 2 - आस्था की डुबकी के साथ मनोरंजन का तड़का, खेलकूद भी - लॉकडाउन में समय गुजारने को मां गंगा का थाम रहे आंचल संवाद न्यूज एजेंसी कमालगंज। लॉकडाउन में स्कूल, कॉलेज, कोचिंग आदि सब बंद हैं। समय गुजारने के लिए युवाओं ने अपने-अपने तरीके ढूंढ लिए हैं। ऐसा ही एक अनूठा तरीका इस समय लोकप्रिय हो रहा है गंगा स्नान का। गंगा तट पर स्नान के लिए बुजुर्गों के साथ युवाओं और बच्चों की संख्या बढ़ी है। गंगा तट का माहौल ऐसा कि मानों हर रोज अमावस-पूर्णमासी हो। आस्था की डुबकी के साथ मनोरंजन का तड़का भी लग रहा है। सोशल डिस्टेंस के साथ कोई गंगा में वॉलीबॉल उछालता है तो कोई तट पर बैठकर समय गुजारता है। नास्ते का भी इंतजाम रहता। मां गंगा हमारे धार्मिक व सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी हैं। कोरोना वायरस की महामारी से देश, विदेश को निजात मिल सके, इसके लिए पूरा देश ईश्वर से कामना कर रहा है। कसबे के लोगों ने इस महामारी के नाश के लिए मां गंगा का आंचल थामा है। सुबह चार बजे से ही कसबे से लोगों का करीब साढ़े चार किलोमीटर दूर स्थित जंजाली नगला गांव के निकट गंगा तट पर पैदल पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसमें महिलाओं और बुजुर्गों के साथ ही बड़ी संख्या में युवा और बच्चे भी शामिल रहते हैं। आस्था की डुबकी के साथ लहरों के साथ खेलने में युवा व बच्चे आनंदित होते हैं। भगवान सूर्य को अर्घ्य भी दिया जाता। मां गंगा से प्रार्थना की जाती कि इस महामारी के संकट से देश को उबार दें। जिससे फिर से स्कूल-कॉलेज खुल जाएं। काम-धंधा चालू हो जाए। समय बिताने को युवा और बच्चे सोशल डिस्टेंस के साथ गंगा तट पर एक-दो घंटे खेलकूद में भी मगन रहते हैं। करीब 8 बजे तक गंगा तट लोगों से गुलजार बना रहता। नियमित रूप से गंगा स्नान कर रहे लोग इस समय गंगा की स्वच्छता व निर्मलता देख भी मुग्ध हो रहे। स्नानार्थियों का कहना है कि नमामि गंगे योजना में करोड़ों रुपये खर्च करके भी जो गंगा निर्मल-अविरल नहीं हो पाई। वह काम लॉकडाउन ने कर दिखाया।