फर्रुखाबाद। जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी से अभद्रता, धमकी, बच्चों को सुपुर्दगी के बदले माता-पिता से धन लेने तथा समकक्ष सदस्यों को मानसिक पीड़ा पहुंचाने के दोषी बाल कल्याण समिति के सदस्य को बर्खास्त कर दिया गया। उस पर नौकरी पाने के लिए सही तथ्यों को भी छिपाने का आरोप है।
महिला एवं बाल विकास अनुभाग के विशेष सचिव महावीर प्रसाद गौतम ने बाल कल्याण समिति के सदस्य रमाकांत शर्मा को बर्खास्त कर दिया। आदेश में कहा कि रमाकांत दोषपूर्ण कृत्यों में संलिप्त था। डीएम की आख्या के अनुसार रमाकांत बच्चों को सुपुर्दगी के बदले माता-पिता से धन उगाही करता था। समकक्ष सदस्यों को शक्तियों का दुरुपयोग कर धमकी भी देता था।
24 फरवरी 2023 को रमाकांत ने जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी सचिन सिंह के साथ अभद्रता कर जानमाल की धमकी दी थी। इस घटना की जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल चंद्र ने जांच के बाद आख्या डीएम को दी थी। जांच के दौरान सामने आया कि रमाकांत खुद को मजिस्ट्रेट बताता था। समकक्ष सोमेश द्विवेदी व शिवानी मिश्रा से मनमाने काम कराने के लिए मानसिक दबाव बनाता था। धन उगाही की कई शिकायतें जांच में सही पाई गईं।
आदेश में कहा कि रमाकांत पूर्व में बदायूं में तैनाती के दौरान हाईकोर्ट गया, मगर वहां से दोषमुक्त नहीं किया गया। मगर सदस्य पद हासिल करने के लिए महिला कल्याण निदेशालय में साक्षात्कार एवं प्रोबेशन अधिकारी के समक्ष कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के समय कूटरचित ढंग से यह तथ्य छिपाया गया। गलत शपथ पत्र और अनुभव प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। इन्हीं आरोपों के चलते नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।
बदायूं में संरक्षण अधिकारी पद से संविदा हुई थी समाप्त
बर्खास्त रमाकांत शर्मा बदायूं जनपद में संविदा पर संरक्षण अधिकारी के पद पर तैनात थे। गलत आचरण, कार्यशैली, शासकीय कार्यों में रुचि न लेने के चलते वहां के तत्कालीन डीएम ने आठ फरवरी 2019 को संविदा समाप्त कर दी थी। इसके बाद रमाकांत हाईकोर्ट की सिंगल बेंच और डबल बेंच में गए, मगर प्रार्थना पत्र दिनांक 22 फरवरी 2019 और 15 मार्च 2019 को खारिज कर दिया गया था।