शमसाबाद। कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बने तीन सरकारी आवास बिना आदेश के ही ध्वस्त करा दिए गए। उन्हें न तो जर्जर घोषित किया गया और न ही मलबे की नीलामी कार्रवाई की गई। सीएचसी प्रभारी इंटीग्रेटेड लैब निर्माण की बात कह रहे हैं तो सीएमओ ने जानकारी से ही इन्कार कर दिया।
सीएचसी परिसर में ही डॉक्टर व कर्मचारियों के लिए सरकारी आवास बने हैं। पुराने तीन आवासों में से एक में रिटायर्ड एएनएम का ताला लगा था। दो आवासों में जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस कर्मचारी रुक जाते थे। इन तीनों आवासों और बरामदे को शनिवार देर शाम बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया गया।
विभागीय सूत्रों की मानें तो इन आवासों को न जर्जर घोषित करने की प्रक्रिया पूरी की गई और न ही मलबे की नीलामी प्रक्रिया हुई। जेसीबी से आवास ध्वस्त कराने के बाद मलबा किनारे लगा दिया गया। इस संबंध में पूछे जाने पर सीएचसी प्रभारी डॉ.सरवर इकबाल ने बताया कि 38 लाख रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड लैब बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग की टीम ने आवासों को ध्वस्त कराया है। कर्मचारियों ने उन्हें नवंबर 2023 में बने लैब के नक्शे पर सीएमओ के भी हस्ताक्षर दिखाए थे। वह जब बैठक से लौटे तो आवास ध्वस्त हो चुके थे। इसकी उन्होंने सीएमओ के स्टेनो व अधिकारियों को भी जानकारी दे दी थी। निर्माण, ध्वस्तीकरण व मलबे की नीलामी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। अधिकारियों के आदेश पर वह हस्तक्षेप भी नहीं कर सकते।
दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि सीएचसी शमसाबाद में किसी भी लैब का निर्माण स्वीकृत नहीं है। यदि बिना आदेश आवासों का ध्वस्तीकरण कराया गया है तो वह उसकी जांच कराएंगे। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। ध्वस्तीकरण व नीलामी की न तो कोई प्रक्रिया हुई और न ही उन्होंने आदेश दिया है।