फर्रुखाबाद में धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज होने से परेशान स्वच्छ भारत मिशन के कमालगंज खंड प्रेरक ने सोमवार को फंदा लगाकर जान दे दी। पत्नी ने बीडीओ समेत तीन अफसरों पर झूठे मामले में फंसाकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। तीनों के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई है।
कादरीगेट थाने के मोहल्ला गंगानगर न्यू कालोनी निवासी प्रदीप कुमार सागर (37) स्वच्छ भारत मिशन में कमालगंज ब्लाक में खंड प्रेरक के पद पर तैनात थे। सोमवार सुबह उनकी शिक्षिका पत्नी सुभद्रा कुमारी स्कूल चली गईं। करीब साढ़े 10 बजे उन्होंने कमरे में दुपट्टा का फंदा लगाकर जान दे दी। कई आवाज देने के बाद भी जवाब न मिलने पर बड़े भाई जितेंद्र कुमार सागर को देखने गए।
अंदर से बंद कमरे की कुंडी तोड़कर फंदे से उतारकर लोहिया अस्पताल लाया गया। वहां डॉक्टर ने प्रदीप कुमार को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर विकास भवन और ब्लाक में काम कर रहे कर्मचारियों, रिश्तेदारों की भीड़ जमा हो गई। सीओ सिटी प्रदीप कुमार ने पहुंचकर परिजनों से बातचीत की।
पत्नी सुभद्रा कुमारी ने थाने में तहरीर दी। कहा कि कमालगंज बीडीओ आलोक आर्य, सहायक विकास अधिकारी सुभाष चंद्र और ग्राम विकास अधिकारी आलोक ने पति पर मुकदमा लिखाया था। तीनों अधिकारी पति को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।
वह दो लाख रुपये भी मांग रहे थे। मानसिक परेशानी के चलते ही उन्होंने आत्महत्या की है। प्रदीप की मां पुष्पा देवी, भाई अरविंद, जितेंद्र और बेटा क्षितिज व बेटी पलक का रो-रोकर बुरा हाल है। सीओ सिटी प्रदीप कुमार ने बताया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
सदमे में सभी कर्मचारी, कार्यालय में छाया सन्नाटा
स्वच्छ भारत मिशन के खंड प्रेरक के फर्रुखाबाद स्थित आवास पर आत्महत्या करने की सूचना आते ही क्षेत्र पंचायत कार्यालय में सोमवार को सन्नाटा छा गया। दोपहर बाद शोकसभा कर कामकाज बंद हो गया। प्रधानों का भी ब्लाक कार्यालय आना-जाना लगा रहा।
ब्लाक स्तरीय अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर से घरेलू शौचालय के पात्रों की सत्यापन सूची भेजने के आरोप में खंड प्रेरक पर 11 जुलाई को स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। कार्यालय में संविदा पर कार्यरत स्वच्छ भारत मिशन के खंड प्रेरक प्रदीप कुमार को ब्लाककर्मी उनके उपनाम बंटी से जानते थे। सोमवार को फर्रुखाबाद स्थित आवास पर उनके द्वारा आत्महत्या कर लेने की सूचना मिलते ही कर्मचारी सकते में रह गए।
दोपहर बाद परिसर में शोकसभा में खंड प्रेरक को श्रद्धांजलि दी गई। प्रदीप कुमार व दूसरे खंड प्रेरक आशीष कश्यप पर 11 जुलाई को कमालगंज थाने में एडीओ पंचायत सुभाषचंद्र की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच अधिकारी उनसे दो बार पूछताछ भी कर चुके थे। इस मामले में विभागीय जांच में भी बयान दर्ज हो चुके थे। इसी से प्रदीप कुमार परेशान चल रहे थे।
मुकदमा न लिखने पर थाने का किया घेराव
खंड प्रेरक प्रदीप कुमार की मौत के बाद पत्नी सुभद्रा ने कमालगंज के बीडीओ समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ तहरीर दी। इसके बावजूद कादरीगेट थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इससे गुस्साए परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। कहा कि जब तक मुकदमा नहीं होता, पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे। पत्नी, मां, बच्चे, भाई समेत रिश्तेदार और साथ काम करने वाले कर्मचारियों की भीड़ कादरीगेट थाने पहुंच गई।
उन्होंने घेराव कर मुकदमा दर्ज करने का दबाव बनाया। पत्नी के साथ कई शिक्षिकाएं भी थाने में मौजूद थीं। जानकारी पर एसडीएम सदर संजय सिंह, सदर तहसीलदार श्रद्धा पांडेय ओर सीओ सिटी प्रदीप सिंह मौके पर पहुंच गए। सभी लोग मुकदमा दर्ज करने पर अड़े थे। पत्नी कई बार बेहोश भी हो गई। थाना प्रभारी विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
कमालगंज के खंड विकास अधिकारी आलोक आर्य का कहना है कि मामले की जांच के लिए उन्होंने सीडीओ को पत्र भेजा था। वहीं, सहायक विकास अधिकारी पंचायत सुभाषचंद्र ने बताया कि डीपीआरओ के आदेशानुसार उन्होंने एफआईआर कराई थी।
ग्राम विकास अधिकारी आलोक दुबे का कहना है कि मामला संज्ञान में आने पर उन्होंने खंड विकास अधिकारी को जानकारी दी थी। अन्य सचिवों से पूछताछ के बाद 22 ग्राम पंचायतों के 322 लाभार्थियों का सत्यापन फर्जी हस्ताक्षर से डीपीआरओ के यहां भेजने की बात सामने आई थी। सत्यापन रिपोर्ट के कवरिंग लेटर पर फर्जी डिस्पैच नंबर डाला गया था।
खंड सहायक ने चार पेज के सुसाइड नोट में लिखा दर्द, बेटे को प्रेरणा
फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाले खंड प्रेरक ने पांच पेज में तीन सुसाइड नोट लिखे हैं। इनमें कहा कि मैं निर्दोष हूं। ऐसा कोई काम नहीं करता, जिससे परिवार की छवि खराब हो। पुत्र के लिए कहा कि मां का हर सपना पूरा करना है। अधिकारियों को उन्होंने ही मामला बताया था और उन्हें ही गलत तरीके से फंसा दिया गया। अब उसके सामने कोई और रास्ता नहीं बचा है।
सुसाइड नोट-एक
खंड विकास अधिकारी कमालगंज, महोदय, आपके द्वारा जो शिकायत की गई थी, उसमें मेरी क्या भूमिका थी। मैने ही आपको अवगत कराया था। मुझे ही आपने फंसा दिया। सर आपको अगर अवगत नहीं कराता तो पता ही नहीं चलता। एडीओ पंचायत ने मुझे किसी स्थिति में नहीं रखा। अब तो मैं किसी के सामने नजर भी नहीं मिला सकता। मैंने हमेशा इज्जत कमाई वह भी आपके द्वारा दूषित हो गई। अब क्या करें सर, अब तो एक ही .......सहारा है। खुद को निर्दोष साबित नहीं कर पाएंगे और आप होने नहीं देंगे। तो जीने का क्या फायदा। आपका- प्रदीप कुमार
सुसाइड नोट- दो
सभी को प्रणाम, आज मैं जो कदम उठा रहा हूं, वो है तो गलत पर क्या करूं मजबूर हूं। मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे परिवार की छवि खराब हो। पर मेरे भाग्य में शायद यही लिखा था। आरती (पत्नी) तुम हमेशा मेरे साथ थीं और मेरे जाने के बाद भी साथ रहेगा। आज मैं जिस दोराहे पर खड़ा हूं, उससे मैं कमजोर हो गया हूं। मेरे ऊपर जो भी आरोप लगे वह गलत हैं। मेरे द्वारा इस प्रकार का कोई कार्य नहीं किया गया। पर मुझे फंसा दिया गया है। मैंने ही बीडीओ साहब को बताया। आलोक दुबे को मैने ही इसकी जानकारी दी। जब अपनों ने ही साथ नहीं दिया, तो आरती बताओ मैं किस पर भरोसा करता। कई बातें लिखने के बाद कहा कि आरती तुम चिंता न करना। मैं तुम्हे परेशान नहीं देख सकता। कुछ दिन परेशान होगी पर सब सही हो जाएगा। मेरा सपना जो है उसे जरूर पूरा करना। मेरे ऊपर जो कलंक लगा, उसे मेरे लड़के के ऊपर नहीं आना चाहिए। उसने जो ठाना है, उसे भाई पूरा कराएंगे। बेटा आपका पापा बेकसूर है। उस पर कभी शक मत करना। अपनी मम्मी का सपना पूरा करना है। मैं रहूं या न रहूं मेरा आशीर्वाद आपके साथ रहेगा। मम्मी और बहन का ख्याल रखना। बस अब कुछ नहीं कहना। आई लव यू आरती, माई सन, बंटी।
सुसाइड नोट- तीन
बच्चो अब आपकी परीक्षा का समय है। मैं आज हूं कल तब आपको क्या करना है।
1- पहली बात हमेशा ध्यान रखना कि तुम्हारे पापा बेकसूर थे। उन्होंने कभी गलत नहीं किया था। जो आरोप आपके पापा पर लगाए वो सब बेबुनियाद हैं। उस स्थिति में आपको बहुत धैर्य से कार्य करना है।
2- बीडीओ, एडीओ और आलोक दुबे द्वारा लगाए गए सारे आरोप गलत हैं। यह भगवान को साक्षी मानकर कह रहा हूं।
3- आप दोनों को अपनी मम्मी का बहुत ध्यान रखना है। खासतौर यश तुमको। क्योंकि अब तुम्हारे ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ रही है। यश तुम को एक नहीं दो-दो लोगों का ख्याल रखना है। एक अपनी मम्मी और दूसरी पलक की। आज मैं मजबूर हूं जो तुम लोगों को अकेला छोड़कर जा रहा हूं।
4- कभी अपने आपको अकेला मत समझना, मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा।
5- पुलिस से हमेशा दूर रहना।
6- और क्या कहूं तुम अब खुद इतने समझदार हो। पर आज भी कह रहा हूं कि मैं गलत नहीं हूं।
7- पलक तुम अपनी मम्मी का पूरा ख्याल रखना। यह मुझसे वायदा करो। तुम्हारा पापा तुम्हारे साथ हमेशा रहेगा। बेटा अपना फर्ज निभाना जिस काम के लिए तुम्हें भेजा है। उसे पूरा करके दिखाना कि मेरे पापा सही थे। तुम्हारा पापा- प्रदीप कुमार सागर