संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। मोहर्रम का चांद होते ही शिया मुस्लिम कर्बला में हुई इमाम हुसैन व उनके जानिसारों की शहादत को लेकर शिया मुस्लिम अलम जुलूस उठाया। जिसमें असलम ईरानी ने नोहा पढ़ा- वो जिसने अपने नाना का वादा वफा कर दिया घर का घर सुपुर्द-ए-खुदा कर दिया। नोहा सुनते ही अजादरों के आंखों से आंसू रुक न सके। जुलूस में या हुसैन की सदाएं बुलंद होती रहीं।
मंगलवार देर रात ठंडी सड़क दरगाह जैनविया से इमाम हुसैन याद में अलम जुलूस उठाया गया। अजादारों ने मातम कर या हुसैन की सदाएं बुलंद कीं। जुलूस अपने कदमी रास्ते से होते हुए सुनहरी मस्जिद पहुंचा। वहां अलम की जियारत करने के बाद इमाम हुसैन के शैदाइयों ने या अली या मौला अली की सदाएं लगाई और कर्बला के शहीदों को याद किया। इसके बाद नावेद अल्वी के आवास पर मजलिस हुई। इसमें शिया धर्मगुरु मौलाना ईशान जैदी ने कर्बला का दर्दनाक वाकया बयान किया। कहा कि कर्बला की कुर्बानी ने इस्लाम को जिंदा रखा है। इस तारीख को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसमें सैयद आफताब हुसैन, सहविल हुसैन, शाहरुख हुसैन ,शाहिद हुसैन, मुंतजिर हुसैन, अम्बर अली आदि लोग शामिल रहे।