फर्रुखाबाद। तीर्थ स्थलों को रोडवेज बस सेवा से जोड़ने की मंशा से अयोध्या व बनारस के लिए शुरू की गई बस सेवा चंद दिन बाद ही बंद हो गई। इन बसों को जिले के बौद्ध तीर्थ संकिसा और नीबकरोरी से भी जोड़ा गया, मगर एक बस सात और दूसरी 15 दिन चलने के बाद बंद कर दी गई। इन बसों को मुख्यालय से बिना अनुमोदन के ही चलवाने की बात कही जा रही है।
सरकार की मंशा है कि जिले भर के लोगों को अयोध्या व बनारस तक आसानी से बस सेवा मुहैया कराई जाए। इन बसों को जिले के बौद्ध तीर्थ संकिसा और बाबा नीब करोरी धाम को भी जोड़़ दिया जाए। इसी मंशा से मार्च के अंतिम सप्ताह में बनारस और अयोध्या के लिए बस सेवा शुरू की गई। बनारस भेजी गई बस को प्रयागराज होकर चलाया गया। प्रयागराज संगम और उच्च न्यायालय के लिए रोजाना लोगों का आना-जाना होता है। इसके बावजूद यह बस सेवा बमुश्किल सात दिन ही चल सकी। वहीं अयोध्या के लिए चली बस को सात दिन आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से फिर हरदोई होकर चलाया गया। इन दोनों बसों को नीबकरोरी धाम और संकिसा से जोड़ा गया था। आमदनी कम होने की बात कहकर इन बसों को बंद कर दिया गया।
बताते हैं कि इन दोनों रूटों पर मात्र एक बस ही चलाई गई, जो दूसरे दिन नहीं जाती थी। लिहाजा यात्रियों को हर हाल में बस मिलने का भरोसा नहीं हो सका। इसके अलावा इन बसों का मुख्यालय से अनुमोदन भी नहीं लिया गया। लिहाजा बिना अनुमोदन के किसी भी बस अड्डा पर वहां का स्टाफ सवारियां नहीं उठाने देता था। वरिष्ठ केंद्र प्रभारी गौरीशंकर ने बताया कि कुछ नई बसों की व्यवस्था होने के बाद अनुमोदन लेकर ही तीर्थ स्थलों तक बस सेवा मुहैया कराने पर विचार किया जाएगा। बसें पीक सीजन पर शुरू की जाएं, तो यात्रियों को भरोसा हो जाएगा और लगातार बस चलती रहेगी।