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Farrukhabad News: आहट लगते ही बाढ़ का एक मात्र वाहन तैयार करने में जुटे ग्रामीण

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फर्रूखाबाद। गंगा व रामगंगा में आने वाली बाढ़ से जिला ही नहीं बल्कि आसपास के दो जिले भी गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। इसको देखते हुए प्रशासन के सहयोग से ग्रामीणों ने अपने स्तर से बचाव के इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। पांचाल घाट पर रहने वाले सोताबहादुरपुर के नाविक नाव का निर्माण करने में जुटे हुए हैं। गंगा के किनारे घाटों पर युद्धस्तर पर नाव बनाने का काम चल रहा है। नाव बनाने वाले मिस्त्री भी तेजी से अपना कार्य पूरा करने में जुटे हैं।
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गंगा में लगातार जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इसको देखते हुए तटवर्ती इलाकों और पांचालघाट के आसपास रहने वाले ग्रामीण सुरक्षा के इंतजाम करने में जुट गए हैं। अमृतपुर तहसील के लिए प्रशासन ने 35 नाव बनाने का आर्डर दिया है। वहीं हरदोई जिले से 100, शाहजहांपुर से 65 नाव बनाने के लिए कारीगरों को आर्डर दिए गए हैं। नाव बनाने में जुटे कारीगरों की माने तो बाढ़ के दौरान 18 फीट की नाव की सर्वाधिक मांग रहती है। इसके अलावा 10, 12, 14 और 22 फीट की नाव भी तैयार की जा रहीं हैं। अल्लादीन का कहना है कि 18 फीट की एक नाव बनाने में दो कारीगरों को तीन दिन लग जाते हैं। वहीं इससे छोटी नाव को एक दिन में ही तैयार कर लिया जाता है। उन्होंने बताया कि आर्डर देने वाले लोग जल्द से जल्द नाव मांग रहे हैं। इसके लिए वह लोग दिन-रात मेहनत कर नाव बनाने में लगे है। गंगा और रामगंगा में जलस्तर बढ़ने से गंगापार का क्षेत्र जलमग्न हो जाता है। इससे ग्रामीण इलाकों का दूसरे गांव से संपर्क कट जाता है। यही नहीं सड़क तक पहुंचने का एकमात्र साधन नाव ही शेष होती है। बाढ़ के दौरान यदि कोई बीमार हो जाता है तो आधी रात को भी नाव से ही मुख्यालय स्थित अस्पताल में लाने के लिए नाव का ही एकमात्र सहारा बचता है।
गंगा नदी में बांधों से छोड़ा जाने वाला पानी अब मैदानी इलाकों में देखा जाने लगा है। बरसात और बांध से आए पानी से गंगा गेज पर पहुंच गई है। हरिद्वार से 53452 क्यूसेक, बिजनौर से 36190 क्यूसेक, नरौरा बांध से 20397 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके चलते जलस्तर में बढ़ोतरी संभव है। गुरूवार को गंगा का जलस्तर 135.25 मीटर था, जोकि शुक्रवार को बढ़कर 135.95 पर पहुंच गया है। चेतावनी बिंदु 136.10 पर है। जबकि हाई फ्लड 137.10 मीटर पर है।
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गंगा का जलस्तर बढ़ने से कटान होने लगा हैं। इससे नदी किनारे रह रहे ग्रामीणों की धड़कने तेज हो गई हैं। गांव धर्मपुर कटरी, ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, करनपुर घाट, समैची चितारपुर, जंजाली नगला, कल्लू नगला आदि गांवों में गंगा का कटान शुरू हो गया है। ग्रामीणों की माने तो जिला प्रशासन की लापरवाही से बाढ़ से बचाव को बनने वाले परकोपाइन का काम भी अधूरा है।
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