दुकानदारों के भारी विरोध पर बैरंग लौटे एआरएम

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ARM returned to barracks on heavy protestersPC: अमर उजाला

फर्रुखाबाद। रोडवेज बस अड्डे के बाहर अवैध रूप से बनीं दुकानों को तुड़वाने के लिए जेसीबी लेकर गए एआरएम को दुकानदारों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। दुकानदारों की नारेबाजी देख वह दो दिन का समय देकर बैरंग लौट गए। दुकानदारों का कहना था कि रोडवेज विभाग उन लोगों को दुकान के बदले दुकान या फिर उचित मुआवजा दे। रोडवेज बसअड्डा फर्रुखाबाद के बाहर सालों से चाय के होटल, भोजनालय और परचून आदि की दुकानें काबिज हैं। कुछ दिन पहले रोडवेज विभाग ने दुकानें अवैध बताते हुए उन्हें नोटिस जारी कर वहां से हटने के आदेश दिए थे। बुधवार सुबह विभाग ने रोडवेज बस अड्डे के अंदर दुकान खाली करवाने का नोटिस चस्पा करवाया। इसकी जानकारी मिलते ही दुकानदारों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कुछ दुकानदारों ने अपना सामान खुद ही निकालना शुरू कर दिया। सामान निकालते देख अन्य दुकानदारों ने इसका विरोध किया और कहा कि वे लोग करीब 60-70 सालों से दुकान रखकर रोजीरोटी चला रहे हैं। ऐसे ही दुकान खाली नहीं करेंगे। गुस्साए दुकानदारों ने एआरएम के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। दोपहर करीब 2.30 बजे एआरएम अंकुर विकास पुलिस बल के साथ जेसीबी लेकर रोडवेज बसअड्डे पहुंच गए। जेसीबी देख दुकानदारों ने कड़ा विरोध जताना शुरू कर दिया। पुलिसबल कम होने के चलते एआरएम दो दिन में कब्जा हटाने की चेतावनी देकर लौट गए। 22 लोगों को दिया गया नोटिस रोडवेज बस अड्डे के बाहर 22 लोग अवैध तरीके से दुकानें रखे हैं। इन लोगों को नोटिस जारी कर दुकानें खाली करने के लिए कहा गया है। पर्याप्त पुलिसबल न मिलने से अवैध रूप से काबिज दुकानें नहीं हटवाई जा सकीं। दुकानदारों को दो दिन का अल्टीमेटम दे दिया है। इसके बाद पर्याप्त पुलिसबल के साथ दुकानें हटवाई जाएंगी। किसी भी कीमत पर अवैध कब्जा नहीं रहने दिया जाएगा। अंकुर विकास (एआरएम, रोडवेज विभाग) दुकानदार बोले, वर्षों से रह रहे अब जाएं कहां फर्रुखाबाद। मुन्नालाल सक्सेना का कहना है कि करीब 65 वर्षों से वह स्पेयर पार्ट्स की दुकान किए हैं। उन्होंने अपनी दुकान का हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है। इसकी कापी वह रोडवेज विभाग, एआरएम और सिटी मजिस्ट्रेट को भी भिजवा चुके हैं। मंजू दीक्षित कहती हैं कि नीचे दुकान और ऊपर मकान है। 60 वर्षों से उनकी सास इसी में रह रही हैं। अब अगर दुकान टूट गई तो वह बेघर हो जाएंगी। नरेंद्र तिवारी ने कहा कि सालों से भोजनालय चला रहे हैं। रोडवेज विभाग को चाहिए कि उन्हें दुकान के बदले दुकान दे। जनरल स्टोर मालिक नीलेश गुप्ता, राकेश सक्सेना, पान-मसाला के थोक विक्रेता सुशील शुक्ल और होटल मालिक सुभाष पाठक का कहना है कि अगर दुकानें टूट गईं तो उनकी रोजी-रोटी छिन जाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि या तो उन्हें रोडवेज विभाग बस अड्डे के अंदर दुकानें बनवाकर दे या फिर उचित मुआवजा मुहैया कराए।
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