फर्रुखाबाद। राज्य सड़क परिवहन निगम के स्थानीय डिपो की कार्यशाला में एआरएम ने ठेका कर्मियों के भुगतान के लिए आए बिल में संदेह जताकर वापस कर दिया। दोबारा में 61 हजार रुपये कम का बिल आया। एआरएम ने फिर भी बिल पास नहीं किया। कहा कि बसें रास्ते में खड़ी हो रही हैं। इससे साफ है कि काम नहीं हो रहा। जबकि मरम्मत का बिल बढ़ रहा है। क्षेत्रीय अफसरों को भी लिखित सूचना दे दी है।
डिपो के बेड़े में करीब 90 बसें हैं। इनकी मरम्मत के लिए फतेहगढ़ में बनी कार्यशाला में ठेका कर्मचारी काम करते हैं। कार्यदायी संस्था ने फोरमैन के माध्यम से मार्च माह का 5,55,042 रुपये भुगतान करने का बिल प्रस्तुत किया। एआरएम आरसी यादव ने इस बिल में संदेह होने पर परीक्षण करके दोबारा बिल देने की बात कही। जब दोबारा बिल आया, तो उसमें 61,096 रुपये की कमी आ गई। 4,93,946 रुपये का बिल दोबारा एआरएम के पास आया। उन्होंने फिर सवाल उठाए। 10 अप्रैल को पत्र जारी कर कहा कि जो बिल प्रतिहस्ताक्षरण के लिए रखा है, उसका औचित्य समझ से परे है। मार्च माह में आउटसोर्सिंग कर्मियों की रोजाना की उपस्थिति देखी जाए। उसके हिसाब से इतने अधिक रुपये का भुगतान नहीं किया जा सकता।
उन्होंने पत्र में हिदायत दी कि कार्यशाला के मद में खर्च दिनोदिन बढ़ रहा है। जबकि बसों की रास्ते में खड़े होने की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इसमें कमी आने का नाम नहीं ले रही है। मार्च माह में करीब 62 बसें रास्ते में खड़ी हो गईं। उन्होंने इस बिल को दोबारा परीक्षण करने के बाद देने के निर्देश दिए। एआरएम की सख्ती से साफ है कि बिल में गड़बड़ी है। उन्होंने क्षेत्रीय कार्यालय को भी इसकी सूचना दे दी है।
मार्च में कार्यशाला में पूरे महीने 25 कर्मियों की उपस्थिति रही। इसके हिसाब से 2.65 लाख रुपये भुगतान होना चाहिए। कार्मिकों की उपस्थिति और उन्हें दिए जाने वाले भुगतान में भी गड़बड़ी बताई जा रही है।
कोई विशेष बात नहीं है। यह रुटीन काम है। खर्चों पर अंकुश लगाना है। जहां भी गड़बड़ी की आशंका होगी, उस पर नजर रखी जा रही है। जिम्मेदारों को यह नहीं लगना चाहिए कि मनमाना काम करवा लेंगे। संशोधित बिल ठीक है।
-आरसी यादव, एआरएम, फर्रुखाबाद डिपो।