फर्रुखाबाद। 30 वर्ष पहले डकैती की घटना को अंजाम करने में एक आरोपी को कोर्ट ने दोषी करार किया है। 12 फरवरी को दोषी को सजा सुनाई जाएगी। तीन आरोपियों को मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
जनपद एटा थाना व कस्बा नयागांव निवासी साहूकार मुकदमे में पैरवी कर फर्रुखाबाद से 6 अप्रैल 1993 को रोडवेज बस से वापस जा रहे थे। मेरापुर थाना क्षेत्र में बस बार्डर पर पहुंची। सिपाही भानू प्रताप शर्मा, रामकिशन यादव बस में राइफल लेकर सुरक्षा के लिए आ गए। गांव झौंत के पास बस को छह लोगों ने रोक लिया। हाथ में तमंचा लेकर यह लोग बस के अंदर घुस आए।
चालक के तमंचा लगाकर गोली मारने की धमकी दी। दोनों सिपाहियों ने बीच बचाव करने का प्रयास किया। बदमाश उनको पकड़कर नीचे ले गए। सिपाहियों के गोली मार दी। सिपाही भानु प्रताप शर्मा की मौके पर मौत हो गई। रामकिशन यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। बदमाशों ने सवारियों के साथ लूटपाट की।
मेरापुर थाना पुलिस ने डकैती का मुकदमा दर्ज कर लिया। विवेचक ने मेरापुर थाना क्षेत्र के ब्राहिमपुर निवासी रामऔतार, गांव स्यानी निवासी धनीराम उर्फ बरूआ, नवाबगंज थाना क्षेत्र के गांव नया नगला निवासी राधे, थाना मऊदरवाजा के गांव लोहयनिया निवासी रामविलास के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान धनीराम उर्फ बरूआ, राधे, रामविलास की मौत हो गई। शुक्रवार को मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने गवाह व साक्ष्य के आधार पर रामऔतार को दोषी करार किया है। 12 फरवरी को दोषी को सजा सुनाने की तिथि नियत की है।