फर्रुखाबाद। शासन व प्रशासन के सख्त निर्देश के बावजूद एटा डिपो की बस स्टाफ ने एक जहरखुरान गिरोह के शिकार यात्री को अस्पताल में भर्ती कराने की बजाय ठंडी सड़क पर फेंक दिया। उसके पास से 30 हजार रुपये, छोटे भाई की शादी के लिए खरीदे नए कपड़े समेत सभी सामान गायब हो गया। उसके पास मिली टिकट पर 42 रुपये बकाया भी लिखे हैं।
फतेहगढ़ के मोहल्ला नगला पजाबा निवासी अरुण कुमार (32) दिल्ली में चौकीदारी का काम करता है। उसके छोटे भाई शिवांश का शुक्रवार को तिलक और नौ जुलाई को बरात है। वह भाई के तिलक और शादी की तैयारी कर दिल्ली से घर के लिए बृहस्पतिवार रात एटा डिपो की बस से बैठा।
पिता शिवनाथ ने बताया कि अरुण ने सुबह करीब सवा तीन बजे पत्नी से फोन पर बात की। इसके बाद उसका फोन नहीं मिला। पड़ोस का ही युवक सुबह अर्रापहाड़पुर मंडी में सब्जी लेने जा रहा था। उसने लालगेट पर ठंडी सड़क की ओर भीड़ लगी देखी। वह पहुंचा तो अरुण को देख परिजनों को सूचना दी। इसके बाद एंबुलेंस से उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
गिरोह के सदस्य उसके पास से 30 हजार रुपये, उसके ससुर की ओर से परिजनों के लिए दिए गए कपड़े, फोन, पंखा के अलावा भाई की बरात के लिए अपने परिवार, बच्चों और भाइयों के लिए लाए कपड़े भी ले गए। पिता ने बताया कि अरुण की जेब में एटा डिपो की बस टिकट मिली। उस पर 42 रुपये बकाया भी लिखे हैं। चालक ने यात्री को अस्पताल में भर्ती कराने की बजाय सड़क किनारे फेंक दिया। गनीमत रही कि उसके साथ अनहोनी नहीं हुई। सीट के पास बैठे एक यात्री के बिस्कुट खिलाने के बाद उसकी हालत बिगड़ी थी।