फर्रुखाबाद। गांवों में सत्ता परिवर्तन के बाद मनरेगा के स्टेट एकाउंट (इसी से मनरेगा मजदूरों की मजदूरी का भुगतान होता है) में पैसा खत्म हो गया है। मनरेगा में मजदूरी कर रहे 99 हजार 439 मजदूरों को होली पर भी मजदूरी का पैसा नहीं मिल सकेगा।
जिले की 603 ग्राम पंचायतों में चुनाव के बाद हुए सत्ता परिवर्तन के दौरान 1 लाख 37 हजार 180 मनरेगा के मजदूर पंजीकृत हुए। इनमें रोजगार केवल 99 हजार 439 मजदूरों को मिल सका। सत्ता परिवर्तन से पहले इनकी मजदूरी पर 15 करोड़ 86 लाख 48 हजार रुपया खर्च किया गया।
जबकि 18 करोड़ 87 लाख रुपया स्टेट एवं मैटेरियल एकाउंट से खर्च किया गया। मौजूदा समय में न तो स्टेट एकाउंट में पैसा है और न ही मैटेरियल एकाउंट में कुछ बचा है। ऐसे में होली पर 99 हजार 439 मजदूरों को पैसा नहीं मिल सकेगा। जिससे उनकी होली फीकी रहेगी।
इस योजना में विकास खंड बढ़पुर में 63 लाख, कायमगंज में दो करोड़ 48 लाख, कमालगंज में दो करोड़ 64 लाख 78 हजार और मोहम्मदाबाद में दो करोड़ 75 लाख 87 हजार तथा नवाबगंज में एक करोड़ 38 लाख 69 हजार, राजेपुर में तीन करोड़ 69 लाख 81 हजार, शमसाबाद में तीन करोड़ 83 लाख 99 हजार रुपया खर्च किया जा चुका है।
अब जिले के सातों विकास खंडों में मनरेगा के मजदूरों की मजदूरी होली तक नहीं मिल सकेगी। केंद्र तथा प्रदेश सरकार ने मनरेगा योजना शुरू करने से पहले पसीना सूखने से पहले मजदूरों की मजदूरी देने का वादा किया था जो होली पर पूरा नहीं हो सकेगा।
मनरेगा जिला कोआर्डिनेटर डॉ. डीआर विश्वकर्मा ने बताया कि 17 करोड़ 84 लाख रुपया मजदूरी और मैटेरियल पर खर्च हुआ है। 1 करोड़ 35 लाख 98 हजार रुपया अन्य विभागों द्वारा खर्च कराए गए कार्यों पर खर्च हुआ है। 6.79 लाख रुपये डीपीसी में खर्च हुए हैं। कुल मिलाकर 18 करोड़ 87 लाख 12 हजार रुपया मनरेगा में खर्च कर दिया गया है। मौजूदा समय में न स्टेट एकाउंट में रुपया है और न मैटेरियल एकाउंट में। होली तक रुपया आने की भी संभावना नहीं है।