फर्रुखाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के 4029 लाभार्थी आवास से वंचित रह सकते हैं। ऐसा इसलिए है कि शासन ने इन लाभार्थियों की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) लेने से इंकार कर दिया है। शासन स्तर से डीपीआर अगर स्वीकृत नहीं हुई, तो इन लोगों को आवास निर्माण की किस्त नहीं मिलेगी। हालांकि विभागीय अधिकारी इस बात से इन्कार कर रहे हैं।
पीएम आवास योजना शहरी का संचालन जिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय (डूडा) से होता है। लगभग तीन साल पहले जनपद में पांच हजार से ज्यादा लोगों ने पीएम आवास योजना शहरी के तहत आवेदन किए थे। ढाई साल तक इन आवेदनों की जांच तहसील स्तर पर अटकी रही। सितंबर 2023 में आवेदनों की जांच की गई तो 771 लोग अपात्र पाए गए।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जनपद स्तर से 4029 लाभार्थियों की डीपीआर तैयार है, लेकिन शासन ने डीपीआर लेने से मना कर दिया है। विभागीय अधिकारी इस मामले को दबाए हैं। लाभार्थियों से कह दिया जाता है कि जल्द ही उन्हें किस्त मिल जाएगी, जबकि हकीकत यह है कि अगर शासन स्तर से डीपीआर स्वीकृत न हुई तो इन लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सिटी लेबल टेक्निकल अधिकारी (सीएलटीसी) नितिन सक्सेना ने बताया कि 4029 लाभार्थियों की डीपीआर तैयार है।
ऑनलाइन आवेदन होना भी बंद, ऑफलाइन लिए जा रहे
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीएमएवाई-अरबन.जीओवी.इन पर ऑनलाइन आवेदन किए जाते थे। लगभग एक साल से ऑनलाइन आवेदन लिए जाने बंद हो गए हैं। हालांकि जिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय (डूडा) ऑफलाइन आवेदन अभी ले रहा है। सूत्रों ने बताया कि सरकार पीएम आवास योजना शहरी बंद करने जा रही है, इसीलिए प्रदेश भर में ऑनलाइन आवेदन की साइट बंद कर दी गई है।
वर्जन
शासन स्तर से पीएम आवास योजना शहरी के 4029 लाभार्थियों की डीपीआर अभी नहीं मांगी गई है। जैसे ही मांगी जाएगी तो भेज दी जाएगी। डीपीआर स्वीकृत होते ही लाभार्थियों के खातों में किस्त पहुंचना शुरू हो जाएगी। -गजराज सिंह, प्रभारी परियोजना अधिकारी, डूडा कार्यालय।