फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया जिला अस्पताल में कोविड कर्मियों की नौकरी जाने के बाद से पीकू वार्ड बंद हो गया। इससे हालात और अधिक बिगड़ गए। पीडियाट्रिक वार्ड के छह बेड पर 10 बच्चे लिटाए गए। सुबह से बालरोग विशेषज्ञ के न आने से ईएमओ की लिखी दवाओं से ही इलाज किया जा रहा है। शाम को आए दो बच्चों को बेड न होने की वजह से बिना इलाज ही लौटा दिया गया।
लोहिया अस्पताल में पीकू वार्ड में बालरोग विशेषज्ञ भी बैठकर बच्चों को देखते थे। 31 जुलाई को पीकू कर्मियों की नौकरी जाने के बाद वार्ड में तालाबंदी हो गई। इसके बाद इमरजेंसी के पीडियाट्रिक वार्ड में इलाज शुरू हुआ। बृहस्पतिवार को छह बेड पर बच्चों की संख्या 10 तक पहुंच गई। जिन बच्चों को बृहस्पतिवार को भर्ती किया गया, उन्हें सुबह से कोई बालरोग विशेषज्ञ देखने नहीं आया।
लिहाजा ईएमओ की लिखी दवाओं से इलाज चल रहा है। शाम को लकूला निवासी अंकित पत्नी के साथ दस्त से पीड़ित डेढ़ माह के जतिन और उल्टी से परेशान दो साल कबीर को लेकर पहुंचे। इमरजेंसी कर्मियों ने बेड फुल होने की बात कह दी। इस पर दंपती बच्चों को लेकर अस्पताल से चले गए। अंकित ने बताया कि बेड खाली न होने की बात कही गई। वह किसी मेडिकल से दवा लेंगे।
शाम करीब सात बजे गढि़या ढिलावल के महेश और शीला नाती दिशांत को लेकर इमरजेंसी पहुंचे। दिशांत बार-बार झटके ले रहा है। ईएमओ डॉ.अभिषेक चतुर्वेदी ने हालत गंभीर देख बालरोग विशेषज्ञ के लिए लिखित कॉल भिजवाई। मगर डॉक्टर काफी देर तक देखने नहीं आए। ईएमओ ने बताया कि हालत ठीक नहीं है। यदि बालरोग विशेषज्ञ नहीं आए, तो वह रेफर करेंगे। उन्होंने बताया कि जो दो बच्चे आए थे उनके पिता से एक बेड पर लिटाकर इलाज करवाने की बात कही, मगर वह राजी नहीं हुए। बिना बताए ही बच्चों को लेकर चले गए।
- पीकू वार्ड बंद होने से कुछ दिक्कत आई है। वह अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करवाएंगे। गंभीर बच्चों को रेफर किया जाएगा। सामान्य का इलाज हर हाल में होगा। बालरोग विशेषज्ञ के न पहुंचने का मामला दिखवाएंगे।
-डॉ. प्रभात वर्मा, प्रभारी सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
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दो माह से प्लांट खराब, लिक्विड ऑक्सीजन भी खत्म
फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल का दो माह से ऑक्सीजन प्लांट खराब है। अभी तक जिम्मेदारों ने सही कराने की जरूरत नहीं समझी। अभी तक लिक्विड ऑक्सीजन से काम चलाया जा रहा था, मगर बृहस्पतिवार को वह भी बंद हो गई। लिहाजा दमा पीड़ित मरीजों को दिक्कत होने लगी। आनन-फानन में मरीजों के लिए सिलिंडरों की व्यवस्था की गई। बता दें कि यह सिलिंडर कुछ घंटे ही चल सकेंगे। अस्पताल प्रशासन ने सही व्यवस्था नहीं की, तो रात में दिक्कत हो सकती है। (संवाद)