सुल्तानपुर रोड स्थित झुनझुनवाला इंजीनियरिंग कॉलेज में अमर उजाला द्वारा आयोजित फोकस ग्रुप में मौजूद युवा।
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युवाओं को देश की रीढ़ माना जाता है। यंगिस्तान पर तो खूब सियासी शोर मचा हुआ है, हमारी परेशानियों पर सियासतदां ध्यान नहीं देते हैं। हमे ललचाने वाले वादों से लुभाने के बजाय हर हाथ को काम देकर जरूरत के सामान खरीदने के काबिल क्यों नहीं बनाते। हमारी शिक्षा को महंगी करने के बजाय सस्ती और सुलभ क्यों नहीं करते। नीचे से ऊपर तक तमाम सरकारी स्कूलों में व्याप्त अव्यवस्था और बदहाल शिक्षा को दुरुस्त करने के साथ स्थानीय स्थर पर रोजगार के लिए आईटी, प्रोडक्टिव इंडस्ट्री आदि की स्थापना क्यों नहीं होती, अयोध्या पर्यटन का हब क्यों नहीं बनता?
अमर उजाला के फोकस ग्रुप में इन्हीं सवालों और उम्मीदों के साथ झुनझुनवाला इंजनियरिंग कॉलेज में युवा वर्ग ने शनिवार को बेबाक राय दी। मेक इन इंडिया पर ज्यादा जोर जमीन पर दिखाने की भी मांग हुई। स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता को अनिवार्य बताया गया, मगर स्वच्छता अभियान की रस्म अदायगी पर सवाल उठे। युवाओं को लालची बनाने के बजाय उनके हाथों को काम देने की मांग मजबूती से उठी।
जाति, धर्म की राजनीति को देश के लिए खतरनाक बताया गया। इससे ऊपर उठकर मतदान करने का संकल्प युवाओं ने लिया। एक युवा ने कहा कि हर युवा के हाथों को काम देने वाली जिसकी सोच हो, ऐसे नेता की जरूरत है। लेकिन अब सियासत ऐसी हो गई है कि लोग लालच देकर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं। एक युवा ने कहा कि जनप्रतिनिधि पांच वर्ष तो काम करते नहीं है।
जब चला चली की बेला आती है तो अति सक्रिय हो जाते हैं। यदि यही सक्रियता पांच वर्ष तक बनी रहे तो विधानसभा क्षेत्र से लेकर प्रदेश की हालत सुधरने में देर नहीं लगेगी। एक युवा ने ब्रेन ड्रेन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रतिभाओं को उनकी योग्यता के अनुसार काम नहीं मिल पा रहा है जिससे हमारे देश की युवा शक्ति दूसरे देश के विकास में अहम योगदान अदा कर रही है।
स्थानीय स्तर पर ऐसी व्यवस्था हो कि ब्रेन ड्रेन पर विराम लगे। एक युवा ने जाति-धर्म की राजनीति बुरी बताते हुए कहा कि जब तक यह चलता रहेगा, तब तक विकास होने वाला नहीं है। ऐसे एमएलए को चुनना है जो जाति और धर्म की राजनीति न करता हो।
आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए एक युवा ने यह कहने में गरेज नहीं किया जब यह व्यवस्था सिर्फ 10 वर्ष के लिए थी तो अभी तक क्यों चल रही है। एक बार इस पर नए सिरे से समीक्षा करने का वक्त आ गया है। युवाओं ने कहा कि जनप्रतिनिधि सरल, सहज, विनम्र और व्यापक दृष्टि वाला हो जिससे कि शिक्षा और रोजगार दोनों स्थितियों में सकारात्मक बदलाव आए।