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श्रीश्री का स्वागत पर पहले बताएं फार्मूला

Wed, 15 Nov 2017 10:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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अयोध्या - फोटो : amar ujala
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अयोध्या। आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर गुरुवार को अयोध्या पहुंच रहे हैं। उनका अयोध्या दौरा रामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद विवाद के लिहाज से अहम माना जा रहा है। श्रीश्री मध्यस्थता के जरिये अयोध्या के मंदिर/मस्जिद विवाद को हल करने की पहल शुरू करने आ रहे हैं, मगर विवाद से जुड़े पक्षकारों में गर्मजोशी नहीं दिख रही है। एक पक्ष पर अखाड़ा परिषद की छाप दिख रही है, तो दूसरा पक्ष बाबरी एक्शन कमेटी व सुन्नी पर्सनल लॉ बोर्ड से निर्देश ले रहा है।
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पक्षकारों का साफ कहना है कि श्रीश्री संत हैं, उनका अयोध्या में स्वागत है। मगर विवाद के समाधान पर चर्चा से पहले फार्मूला बताना होगा। श्रीश्री रविशंकर के लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बुधवार सुबह मिलने से लेकर बाबरी एक्शन कमेटी से बातचीत की कोशिश समेत सभी पहलुओं पर दिनभर पक्षकारों की नजर थी। यहां पहले सुलह-समझौते के केंद्र में हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास काफी सक्रिय रहे हैं, मगर योगी सरकार में खामोश हैं।

समझौते की लंबे समय से कोशिश कर रहे हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस पलोक बसु भी हाशिए पर हैं। 12 नवंबर को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने यहां आकर सुलह-समझौते के लिए दोनों पक्षों के साथ बैठक की। मुसलिम पक्ष शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी के प्रस्ताव से खासा नाराज हुआ और बैठक का बहिष्कार कर दिया। अब श्रीश्री के सामने चुनौती है कि दोनों को एक साथ कैसे बिठाएं, जबकि मुसलिम पक्ष बाबरी एक्शन कमेटी व सुन्नी पर्सनल लॉ बोर्ड से बुधवार को दिशा निर्देश लेता दिखा।
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फिलहाल, दोनों तरफ के पक्षकारों में निर्मोही अखाड़ा को छोड़कर बाकी सभी उत्साहित नहीं दिख रहे हैं। उनका कहना है कि मामले की सुनवाई पांच दिसंबर से शुरू होने जा रही है, ऐसे में महज एक पखवारे के भीतर रविशंकर छह दशक से ज्यादा के समय से चल रहे विवाद का समाधान सुलह-समझौते से किस तरह करा लेगें? पक्षकारों ने यह भी कहा कि रविशंकर संत हैं। उनके अयोध्या आगमन का स्वागत है, हम वार्ता करेंगे लेकिन पहले श्रीश्री रविशंकर सुलह-समझौता का फार्र्मूला बताएं।

इसके बाद आगे की दिशा तय की जाएगी। पक्षकार हाजी महबूब बुधवार को दिल्ली में थे। वे वहां मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले वकील के बुलावे पर कागजी कार्रवाई पूरी करने गए हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि श्रीश्री को मामले की पैरवी कर रहे बाबरी एक्शन कमेटी के संयोजक अधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने लखनऊ में मिलने से मना कर दिया है। हम सभी बाबरी एक्शन कमेटी व सुन्नी सेंट्रल पर्सनल लॉ बोर्ड से दिशा निर्देश ले रहे हैं। रविशंकर अगर बिना किसी ठोस फार्मूले के आएंगे तो कोई मतलब नहीं रहेगा। 

सब कुछ फार्मूले पर निर्भर : धर्मदास
निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत व मामले में पक्षकार महंत धर्मदास ने कहा कि रविशंकर संत हैं। उनका अयोध्या में स्वागत है। कोई भी अयोध्या में राम मंदिर बनाने की बात करता है तो, हम उनका स्वागत करेंगे। लेकिन सवाल यह है कि रविशंकर मामले में कोई पक्ष नहीं है, पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या वह सरकार के प्रतिनिधि के रूप में वार्ता करने आ रहे हैं। सब कुछ उनके फार्मूले पर निर्भर करता है।

अयोध्या में श्रीश्री का करेंगे स्वागत : महंत दिनेंद्र दास
निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि श्रीश्री रविशंकर अखाड़े में आएं और पंच लोगों से वार्ता करें। वे एक अच्छे संत हैं, उनका स्वागत है। हमने रविशंकर जी से मुलाकात भी की है। वे अयोध्या मामले के समाधान को लेकर गंभीर हैं। बातचीत का दौर जारी रहना चाहिए। हमें उम्मीद है कि रविशंकर की पहल कामयाब होगी और अयोध्या मामले के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।

सुलह-समझौते में शामिल हो सरकारी पक्ष : हाजी महबूब
पक्षकार हाजी महबूब कहते हैं कि सुलह-समझौते की कोशिश में जब तक कोई सरकारी पक्ष शामिल नहीं होता, तब तक इस प्रकार की किसी भी वार्ता का कोई मतलब नहीं है। रविशंकर मामले में पार्टी भी नहीं है, ऐसे में वे किस हैसियत से वार्ता करना चाहते हैं, यह भी स्पष्ट होना चाहिए। रविशंकर घर आएंगे तो स्वागत है, दुश्मन भी आएगा तो वार्ता करने में क्या जाता है। लेकिन मैं कहीं वार्ता करने नहीं जाऊंगा।

रविशंकर की पहल से बहुत उम्मीद नहीं : इकबाल अंसारी
बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे स्व. हाशिम अंसारी के बेटे व पक्षकार इकबाल अंसारी कहते हैं कि सुलह-समझौते के लिए प्रयास लगातार हो रहे हैं लेकिन जब तक इस मुकदमे के सभी पक्षकार एक साथ नहीं बैठेंगे, बात नहीं बनेगी। ऐसे में रविशंकर की पहल मामले के समाधान को लेकर बहुत उम्मीद पैदा नहीं करती। रविशंकर अयोध्या वार्ता करने आ रहे हैं, हम वार्ता करेंगे। श्रीश्री के पास मामले के समाधान को लेकर क्या फार्र्मूला है, तभी पता चल पाएगा।

लोगों को भ्रमित करने आ रहे श्रीश्री : ज्ञानदास
अयोध्या। हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास ने बुधवार को अयोध्या मामले में मध्यस्थता कर रहे श्रीश्री रविशंकर की पहल को दिखावटी करार दिया। उन्होंने कहा कि वे अयोध्या मामले में सुलह-समझौते की बात कर रहे हैं, पर यह महज जनता को भ्रमित करने के लिए है। अब बहुत देर हो गई है। पांच दिसंबर से कोर्ट में सुनवाई शुरू होने जा रही है जो कोर्ट से निर्णय आएगा वही मान्य होगा। उन्होंने श्रीश्री रविशंकर पर निशाना साधते हुए कहा कि जो संत, महंत आध्यात्मिक गुरु समझौते की बात कर रहे हैं, वह केवल स्वयं को चमक में लाने के लिए है। अयोध्या में मस्जिद की कोई जरूरत नहीं है, यहां पहले से ही मस्जिदें हैं। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व श्रीश्री ने उन्हें कर्नाटक स्थित आश्रम पर बुलाया था, उनकी मुलाकात हुई। उस समय उन्होंने कुछ अलग बात की थी, आज वे भाईचारे, समझौते की बात कर रहे हैं।

विहिप ने कहा, वार्ताओं का दौर अब समाप्त
श्रीश्री रविशंकर की अयोध्या मामले में मध्यस्थता की पहल को विहिप निरर्थक मान रही है। विहिप का ध्यान 24 नवंबर को कर्नाटक के उडुप्पी में होने वाली धर्मसंसद की ओर है। विहिप का मानना है कि सुलह समझौते की अब कोई गुंजाइश नहीं बची है। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि पुरातात्विक साक्ष्य यह सिद्ध करते हैं कि यह रामजन्मभूमि है। मुस्लिम पक्ष ने शपथ पत्र दिया था कि अगर विवादित स्थल पर मंदिर का अंश सिद्ध हो जाएगा तो वह अपना दावा वापस ले लेगा। कहा कि यह सिद्ध हो चुका है कि उस स्थान पर राम मंदिर था, अब किस बात का समझौता। मुस्लिम पक्ष अपने वादे से मुकर गया और कोर्ट में लड़ाई लड़ रहा है, उसे मुकदमा वापस लेना चाहिए।

श्रीश्री आज पहले नृत्यगोपाल से मिलेंगे, फिर पक्षकारों से करेंगे बात
फैजाबाद। श्रीश्री रविशंकर के अयोध्या दौरे से पहले बंगलुरु आश्रम से यहां पहुंचे स्वामी भानु ने कार्यक्रम की रूपरेखा तय की। अयोध्या के शीर्ष प्रमुख संतों व महंतों से मुलाकात कर तैयारी को अंतिम रूप दिया। इसके तहत श्रीश्री पहले सुबह साढ़े 10 बजे श्री रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास से मिलेंगे, फिर पक्षकारों से वार्ता करने जाएंगे।
श्रीश्री के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए पिछले पांच दिनाें से स्वामी भानु अयोध्या में डटे हुए हैं।

इस क्रम में स्वामी ने श्री रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, निर्मोही अखाड़ा के महंत रामदास, सद्गुरू सदन के महंत सिया किशोरीशरण, अशर्फी भवन के जगद्गुरु श्रीधराचार्य, कौशलेष सदन के विद्याभास्कर, दंतधावन कुंड के नारायणाचारी, उत्तरतोताद्रि मठ के स्वामी अनंताचार्य, प्रमुख धर्माचार्य डॉ. रामविलास दास वेदांती व बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के मुद्दई इकबाल अंसारी से मुलाकात कर कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया। संस्था के मीडिया प्रभारी दिनेश जायसवाल ने बताया कि 16 नवंबर को श्रीश्री सुबह 10:30 बजे अयोध्या पहुंचेंगे।
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