रामलला के 67वें प्राकट्य महोत्सव का पूजित कलश रविवार को अधिगृहीत परिसर स्थित गर्भगृह में ले जाया गया। समिति सदस्यों ने कलश को रामलला के पुजारी को परिसर के रंगमहल बैरियर पर जाकर सौंपा। नौ दिवसीय प्राकट्य महोत्सव का समापन मंगलवार को कलश विसर्जन के बाद भव्य शोभा यात्रा के साथ होगा।
श्रीराम जन्मभूमि सेवा समिति के तत्वावधान में वर्ष 1949 से रामलला के प्राकट्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। समिति ने गत चार जनवरी को वैदिक पूजन-अर्चन के साथ श्रीराम जन्मभूमि संपर्क मार्ग के सामने स्थित क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में कलश स्थापना के साथ रामलला केे 67वें प्राकट्य महोत्सव की शुरूआत की। प्रतिदिन पूजन-अर्चन के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे थे।
समिति के महामंत्री पं. राम प्रसाद मिश्र ने बताया कि विवादित परिसर के रिसीवर मंडलायुक्त की अनुमति के आधार पर रविवार को पूजित कलश, चित्रपट, मिठाई, फूल, हार आदि को अधिगृहीत परिसर स्थित गर्भगृह में विराजमान रामलला के सहायक पुजारी अशोक उपाध्याय को रंगमहल बैरियर पर सौंपा गया।
कलश को रेजीडेंट मजिस्ट्रेट डॉ. संतोष, सीओ दिनेश द्विवेदी, कोतवाल आरएस कमल, थानाध्यक्ष रामजन्मभूमि नरेद्र सिंह के साथ समिति के अध्यक्ष महंत रामचरित्र दास, संयोजक संजय शुक्ला, पराग मिश्र, रामप्रसाद, गोपीनाथ, हरिशंकर, रामनाथ आदि अधिगृहीत परिसर तक ले गए थे।
12 जनवरी को अधगृहीत परिसर से पूजित कलश को वापस लेकर पूजन-अर्चन के बाद सरयू में विसर्जन किया जाएगा। दोपहर बाद क्षीरेश्वरनाथ मंदिर से गाजे-बाजे व हाथी-घोड़े के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी। नगर भ्रमण के बाद यात्रा की वापसी के साथ ही प्राकट्य महोत्सव का समापन होगा।