गुरुवार सुबह तीन स्थानों पर टूटे ट्रैक को बदलने के लिए बगल में गिराई गई पटरी।
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मॉडल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक का ट्रैक सुबह फिर टूट गया। आनन-फानन में पहुंचे इंजीनियरिंग विभाग के कर्मियों ने ड्रिल मशीन से ट्रैक में छेदकर क्लैंप कस दिया। मीडिया को भनक न लगे, इसके लिए परिचालन से जुड़े सभी विभागों के अधिकारी ‘एक सुर‘ में ट्रैक न टूटने का राग अलापते रहे।
पटरी टूटने व क्लैंप कसने के दौरान ड्रिल मशीन से गिरी लोहे की छीलन इसकी चुगली करती रही। बाद में करीब पांच मीटर की दूरी पर तीन खंडों में बंटी पटरी की जगह बिना ब्लॉक दोपहर में नई लाइन डालने का प्रयास भी विफल हो गया।
रेलवे सूत्रों के अनुसार सुबह कोई ट्रेन न होने के दौरान एक रेल कर्मी को भोजनालय के ठीक सामने ट्रैक टूटा दिखा। यह प्लेटफॉर्म एक की वही उत्तरी पटरी और स्थान है, जहां से कुछ दूरी पर 11 जनवरी को साबरमती, उसके बाद दो फरवरी को किसान एक्सप्रेस के दबाव से ट्रैक टूट चुका व क्लैंप से कसा गया है। सूचना पर सुबह ही इंजीनियरिंग विभाग पहुंच गया।
तत्काल पटरियां छेदी गयीं और क्लैंप कस दिया गया। इंजीनियरिंग विभाग के साथ ही ट्रैक ठीक करने व परिचालन से जुड़े सभी लोग ट्रैक टूटने से इनकार करते रहे, लेकिन ड्रिल मशीन से गिरी छीलन चुगली करती रही। दोपहर 12:30 बजे से कुछ पहले तीन खंडों में बंटी पटरी को हटाकर लगभग 32-35 फीट लंबी नई लाइन गिरा दी गयी।
ड्रिल मशीन को पटरी में लगाया गया, लेकिन घुमाते ही उसकी धुरी (बर्मा) टूट गयी। कर्मियों ने दूसरी धुरी देने के लिए अधिकारी अनूप को फोन किया तो उन्हें एसएसई एसएंडटी जेपी श्रीवास्तव से मांगने को कहा गया। जेपी श्रीवास्तव ने कहा कि जिससे धुरी टूटी हो वही खरीद कर लगाये। इस पर पटरी बदलने का काम रुक गया। स्टेशन अधीक्षक दिग्विजय कुमार ने बताया कि पटरी लगाने के लिए इंजीनियरिंग विभाग ब्लॉक लेने जा रहा है।