समय बदलने के साथ सुबह स्नान करके यमराज की पूजा करने का चलन तो अब रहा नहीं, हां शाम को लोग घरों में और प्रवेश द्वार पर दीया जरूर जलाते हैं। छोटी दीपावली मनाने के लिए दिल्ली, खील, नया चूड़ा और बतासा की खरीदारी करने को बाजारों की ओर रुख करेंगे।
मान्यता - अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पं. श्रुतिधर बताते हैं कि नरक चतुर्दशी मनाने के पीछे कहानी यह भी है कि नरकासुर राक्षस ने 16 हजार कन्याओं को बंदी बनाया था।
कार्तिक कृष्ण की चतुर्दशी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वधकर कन्याओं को मुक्त कराया। कन्याओं ने श्रीकृष्ण से कहा कि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। आप ही कोई उपाय करें। कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए सत्यभामा के सहयोग से श्रीकृष्ण ने सभी से विवाह कर लिया।
इसी उपलक्ष्य में नरक चतुर्दशी के दिन दीपदान की परंपरा शुरू हुई। मंगलवार की सुबह स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 05:38 बजे से लेकर 07:25 बजे तक का है। दीपदान सायंकाल 05:36 बजे के बाद होगा।
मृत्यु बाद नर्क जाने से बचने के लिए लोग सुबह स्नान कर यमदेव की पूजा करते थे। शाम को उन्हें ही दीपदान भी किया जाता था। सुबह स्नान कर यम की पूजा करने की परंपरा अब कहीं नहीं दीखती।
- लल्लन सिंह, समाजसेवी।
छोटी दीपावली को आज भी उनके यहां सुबह स्नान कर यमदेव की पूजा की परंपरा है। कहा जाता है ऐसा करने वाले को नर्क नहीं जाना पड़ता। पुरानी परंपराएं नाहक नहीं हैं, इन्हें हर किसी को निभाना चाहिए।
- जितेंद्र सिंह, पूर्व स्पोट्र्समैन एवं वालीबाल कोच।
दीपावली पर्व मनाना तो पिछले तीन दिनों से चल रहा है। घर झालरों से जगमग हो गया है। मंगलवार को और पटाखे खरीदेंगे। शाम को दीया भी जलेगा।
- करनराज वर्मा ।
मंगलवार को छोटी दीपावली होने की जानकारी है। मम्मी पापा ने यही बताया है। नरक चतुर्दशी के बारे में उन्हें नहीं पता। दीपावली पर अब जमकर मस्ती होगी।
- सत्येंद्र गुप्ता।