प्रदेश सरकार के ताजा मंत्रिमंडल विस्तार में यहां के युवा विधायक पवन पांडेय की ताजपोशी के गूढ़ मायने निकाले जा रहे हैं। समझा जा रहा है कि सपा की तरफ से अयोध्या पर अपनी पकड़ सहेजने की यह सधी कवायद है।
बीते विधानसभा चुनाव में सपा के युवा नेता तेजनारायण ने अभेद भगवा दुर्ग कहे जाने वाले अयोध्या विधानसभा सीट को जीत कर भाजपा के मिथक को तोड़ दिया था।
भगवा दुर्ग में कमल को कुम्हलाने की स्थिति में पहुंचाने वाले पवन को राज्यमंत्री बना सपा सरकार ने बड़ा संदेश दिया।
लेकिन दुर्भाग्य से खनन और अधिकारी को धमकाने जैसे आरोप लगे और फिर 16 माह बाद ही मंत्री पद से बर्खास्त कर दिए गए।
विधानसभा चुनाव में जिस लल्लू सिंह की दो दशक की बादशाहत को पवन ने खत्म किया था, महज दो वर्ष बाद ही वहीं लल्लू सिंह लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड ढाई लाख मतों से जीत दर्ज कर हार का बदला ले लिया।
16 माह बाद एक बार फिर पवन को मंत्री बना सपा हाईकमान अयोध्या व उसके आसपास के विधानसभा क्षेत्रों को मिशन 2017 के लिए सहेजने की कोशिश करती हुई नजर आ रही है।
तेजनारायण पांडेय पवन की हुई ताजपोशी के पीछे सियासी पंडित कई कारणों को एक साथ जोड़कर देख रहे हैं। सूबे के विभिन्न शहरों में सांप्रदायिक उभार से सरकार परेशानी में थी।
फैजाबाद में भी दुर्गापूजा और मोहर्रम के पहले छिटपुट घटनाएं हुई जिससे अनहोनी की आशंकाएं बढ़ गई थीं लेकिन पवन की इन त्योहारों पर अति सक्रियता और दोनों पक्षों से बातचीत के कारण सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से निपट गया।
मंत्री रहने के दौरान अयोध्या में विकास भी खूब हुआ। देवकाली-चौक फ्लाईओवर, जीआईसी में रुके पड़े फ्लाईओवर के निर्माण कार्य शुरू कराने सहित तीन सौ सड़कों के निर्माण में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई।
विकास के साथ ही विवाद से भी पवन का गहरा रिश्ता रहा। अवैध खननकर्ताओं को संरक्षण देने और तत्कालीन आरएफसी एवं सिटी मजिस्ट्रेट को धमकी दिए जाने का आरोप भी लगा। इसका नतीजा रहा कि सिर्फ 16 माह ही मंत्री रह सके।
मंत्री पद से बर्खास्त किए जाने के 16 माह बाद ही एक बार फिर शालीनता, संगठन गुर और सियासी शक्ति की त्रिवेणी पवन के व्यक्तित्व में बहने लगी है लेकिन वह अपनी खोई शक्ति को एक बार फिर पाने के बाद कितने सहज और सरल रह सकते हैं, यह तो सपा और पवन दोनों का मिशन 2017 की सफलता-विफलता तय करेगा।