इस बार मौसम ने शुरू से ही किसानों को दगा दिया। खेत से लेकर तालाब तक सूखे हैं। खेतों में धूल उड़ रही है। तालाबों में पानी नहीं होने से पशु-पक्षियों को पानी पीने के लाले पड़ने वाले हैं।
किसान फसल को बचाने के लिए सिंचाई कर रहे हैं, मगर बिजली की भयंकर कटौती कोढ़ में खाज बन गई है। साथ ही सरकारी नलकूपों की खराबी नमक छिड़क रही है। मौसम का रुख देख कर किसान परेशान हैं। यदि यही हाल रहा तो छटांकभर अनाज पैदा होना मुश्किल हो जाएगा।
सूखे से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी केवल कागजों पर है। अधिकारियों का कहना है कि सप्ताह बाद सूखे का असर दिखेगा, तब आकलन शुरू होगा।
किसानों को मौसम के साथ-साथ नलकूप, नहर और बिजली भी धोखा दे रही है। जिले में 95 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की गई है।
इसके अलावा अरहर और सब्जी की 45 हजार हेक्टेयर पर खेती हो रही है। पानी नहीं बरसने से धान की फसल पूरी तरह से प्रभावित हुई है।
अब सब्जी और अन्य फसलों पर इसका असर देखने को मिल रहा है। एक सप्ताह से मानसून पूरी तरह से रूठ गया है। कड़ाके की धूप ने किसानों की और बेचैनी बढ़ा दी है।
कहीं नलकूप खराब हैं तो कहीं पर टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। बिजली नहीं आने से निजी नलकूप संचालक भी अपनी फसल की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
जून 106.50 मिमी 50.6 मिमी
जुलाई 306.10 मिमी 175 मिमी
अगस्त 282 .00मिमी 175.91 मिमी
अभी तक फसलों को कोई विशेष नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन यदि अब पानी नहीं बरसा तो धान की उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पडे़गा। एक सप्ताह बाद आकलन शुरू होगा। डॉ. राजेश कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी