अस्पताल के बेड पर लेटे तीनों बच्चे।
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तमसा नदी के तट पर आबाद ऐमीआलापुर की वंदना वंश परंपरा की अद्भुत वाहक बनीं। वैसे तो जुड़वा बच्चों के जन्मने की संस्कृति से संपन्न है वंदना का मायका दरियापुर लेकिन उसके पति अवध कुमार की परिवार की परंपरा में भी जुड़वा बच्चों के पैदा होने के गुण है।
लेकिन इस मायने में दरियापुर ज्यादा संपन्न है। वंदना तो एक कदम और आगे निकल गई जब उनके आंगन में तीन बच्चों की किलकारी एक साथ गूंजी। स्थानीय लोग आश्चर्यचकित हैं जबकि वंदना का परिवार आनंद-उमंग और उत्साह से सराबोर है।
पूराबाजार की ऐमीआलापुर की वंदना का मायका तारुन ब्लॉक के दरियापुर में है। उनके मायके में तकरीबन डेढ़ दशक पूर्व पहली बार जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ। राजदेव तिवारी दो बच्चों के पिता बने तो उसके बाद उदय प्रकाश तिवारी को भी यह सुख नसीब हुआ।
वंदना के चाचा की लड़की पूनम की शादी बस्ती जिले में हुई है। 10 वर्ष पहले पूनम को भी जुड़वा बच्चे हुए जिनका नाम लकी और अंश है। वंदना के पति अवध कुमार दुबे के परिवार में रिश्ते में उनके दादा घनश्याम दुबे को दो दशक पहले जुड़वा बच्चे हुए जिनका नाम सोनू और छोटू है।
जुड़वा बच्चों के जन्मने का गजब संस्कार है दरियापुर और ऐमीआलापुर में लेकिन वंदना वंश परंपरा की अद्भुत वाहक बनी क्योंकि उन्होंने तीन बच्चों को शहर के नर्सिंगहोम में जन्म दिया। अवध कुमार ने बताया कि मेरे परिवार के लिए ईश्वर की अद्भुत देन है कि एक साथ ही दो बच्ची और एक बच्चा हमें मिल गया।
डॉ. जनार्दन प्रताप ने कहा कि कभी-कभी निषेचन क्रिया के दौरान दो भ्रूण विकसित हो जाते हैं। इसी वजह से जुड़वा बच्चे जन्म लेते हैं। जब दो से अधिक भ्रूण सक्रिय रूप से विकसित होते हैं तो जितने भी भ्रूण विकसित होते है, गर्भ में उतने ही शिशु पलते हैं। यदि किसी परिवार में बार-बार जुड़वा जन्म ले रहे है तो वह आनुवांशिक लक्षण है।