यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक्स यूनियन के आह्वान पर नौ श्रमिक संगठनों के बैनर तले बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों ने बैंकिंग क्षेत्र में किए जा रहे सुधार के विरोध में शुक्रवार को हड़ताल किया। इन लोगों ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की सिविल लाइंस शाखा के सामने एकत्र होकर प्रदर्शन व जमकर नारेबाजी की।
बैंकों में हड़ताल से करीब सौ करोड़ रुपये की क्लीयरिंग प्रभावित हुई। विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यूनियन के संरक्षक वीके सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार बैंकिंग जगत को गिरवी रखना चाह रही है जिसे हम होने नहीं देंगे। सचिव डीसी टंडन ने कहा पूंजीपतियों के हाथों में बैंकों को जाने नहीं दिया जाएगा।
एसपी चौबे ने कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के हाथ में जनता की गाढ़ी कमाई को देना चाहती है। कहा जा रहा है बैंकिंग सुधार लेकिन इससे वृहद स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। हम ईंट से ईंट बजा देंगे।
विरोध प्रदर्शन में केके रस्तोगी, सुभाष श्रीवास्तव, हेमंत, विकास श्रीवास्तव, अभिषेक, जेपी गुप्ता, प्रतीक्षा सिंह, डीवी सक्सेना, आरबी यादव, पीके खन्ना आदि मौजूद रहे। बैंकों में हड़ताल के कारण तमाम ग्राहकों को समस्याओं का सामना करना पड़ा।
स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, पीएनबी आदि बैंक पूर्णतया बंद रहे। बैंकों में हड़ताल होने के कारण शुक्र वार को करीब सौ करोड़ की क्लीयरिंग प्रभावित हुई। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक्स यूनियन के केके रस्तोगी ने बताया कि औसतन प्रतिदिन सौ करोड़ की क्लीयरिंग होती है जो कि हड़ताल के कारण नहीं हो पाई।
गोसाईगंज प्रतिनिधि के अनुसार, मांगों को लेकर बैंकों के सामने नारेबाजी कर प्रदर्शन करते हुए बैंक के बाहर ताला लटका दिया। प्रदर्शन करने वालों ने सुशील कुमार, प्रतीक कुमार, मनीष, हबीब, विजय कुमार, शिव नारायण, अजीत कुमार आदि बैंक कर्मचारी उपस्थित थे।
सोहावल प्रतिनिधि के अनुसार, बड़ौदा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को छोड़कर सभी बैंक बंद रहे। बैंकों की बंदी के कारण एटीएम बूथों पर ग्राहकों का दबाव बढ़ा तो दोपहर बाद वह भी जवाब दे गए। स्टेट बैंक, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि बंदी में शामिल रहे।
रौनाही, अरकुना, मुबारकगंज, बड़ागांव आदि में चलने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक खुले रहे। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के रीजनल मैनेजर आरपी वर्मा ने बताया ग्रामीण बैंक हड़ताल से दूर है। कमोबेश ऐसी ही तस्वीरें बीकापुर, तारुन, पूरा, मया, अमानीगंज, रुदौली, मवई, कुमारगंज, हैरिंग्टनगंज आदि बाजारों की भी रही।