वेतन विसंगति को लेकर बुधवार को राज्य कर्मचारियों ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो आंदोलन तेज किया जाएगा। फिर भी बात न बनी तो हड़ताल के विकल्प पर भी विचार होगा। धरने के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भेजा गया।
जिला कृषि अधिकारी कार्यालय परिसर में आयोजित धरने में प्रदेश उपाध्यक्ष शंकर यादव ने कहा कि केंद्र सरकार को सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट मिल गई लेकिन प्रदेश में अभी छठवें वेतन आयोग का लाभ भी नहीं मिल पाया।
केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर लाभ तो अभी दूर की कौड़ी है।
ऐसे में कर्मचारियों के आंदोलित होने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है। कहा कि शैक्षणिक भत्ता और परिवहन भत्ते जैसी मांगें अब तक अधूरी हैं। सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू होने के पहले छठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट पूरी तरह लागू करके पूर्ण लाभ दिया जाना चाहिए।
नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने मांग न मानी तो 26 फरवरी को मंडलों पर धरना-प्रदर्शन होगा। 11 मार्च को विधानसभा पर धरना-प्रदर्शन होगा। चेतावनी दी गई कि यदि प्रदेश सरकार ने विसंगतियां दूर करके केंद्र के बराबर प्रदेश के कर्मचारियों के भत्तों का शासनादेश न जारी किया तो हड़ताल जैसे आंदोलन की घोषणा होगी।
धरने में विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। धरने को जिलाध्यक्ष शिव बहादुर यादव, आशीष श्रीवास्तव, अरविंद कुमार सिंह, सुशील तिवारी, मंत्री ज्ञानचंद्र, सूर्यप्रकाश मिश्र, नाथू पांडेय, नरेंद्र प्रताप सिंह, संतोष कुमार गुप्ता, रविकांत भास्कर ने संबोधित किया।