यह खुलासा हुआ है पानी की गुणवत्ता की जांच में। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग ने नगरपालिका को पत्र भेज कर पानी की गुणवत्ता सुधारने की सलाह दी है।
शहर के विभिन्न मोहल्लों से 17 से 22 अगस्त के बीच पानी की जो सेंपलिंग ली गई वह चौंकाने वाली है। पानी के 50 फीसदी से अधिक नमूने फेल पाए गए हैं। इस दौरान नगर क्षेत्र से 87 पानी के नमूने संकलित किए हैं।
जिसमें से 50 नमूने फेल पाए गए हैं। शहर में पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम पानी की गुणवत्ता की जांच करती है।
बरसात के मौसम में संक्रामक बीमारियों के फैलने की संभावनाएं अधिक होती है। इसलिए इस दौरान अनिवार्य रूप से पानी की गुणवत्ता परखी जाती है। 17 अगस्त को पानी के 14 नमूने संकलित किए गए है।
जिसमें से छह नमूने फेल पाए गए। 18 अगस्त को पानी के 15 नमूने की जांच हुई तो भी छह नमूने मानक पर खरा नहीं उतरे। 19 अगस्त और 22 अगस्त को तो हद हो गई।
जिस भी मोहल्ले से पानी का नमूना संकलित किया सब के सब फेल पाए गए। 19 अगस्त को 15 और 22 अगस्त को 13 पानी के नमूनों की जांच की गई। ये सारे नमूने मानक पर खरा नहीं उतरे। इसी प्रकार 20 अगस्त को 15 में से चार और 21 अगस्त को 15 नमूनों में से छह नमूने फेल पाए गए हैं।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष डॉ. छैल विहारी दुबे का कहना है कि पानी की आपूर्ति जिस प्रकार से नगरपालिका से की जा रही है, उससे संक्रामक बीमारियां बढ़ेंगी। पीलिया, डाइफायड, डारिया जैसी बीामारियों का प्रकोप बढ़ेगा। शरीर से रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आएगी।