अयोध्या। योगी सरकार के छठे दीपोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। दीपोत्सव रामनगरी के कुम्हारों की तकदीर भी बदल रहा है। जिस चाक को नई पीढ़ी छूने से परहेज करती थी, अब उन पर अंगुलियां नाचते नहीं थक रही हैं।
जिले के जयसिंहपुर के 40 कुम्हारों का तो दीपोत्सव ने जीवन ही बदल दिया है। इस बार भी इन परिवारों को दीप बनाने का ऑर्डर मिला है। कुम्हारों की मानें तो दीपोत्सव के कारण दिवाली का त्योहार आर्थिक रूप से भी उनके घरों में रौनक लेकर आता है।
दीपोत्सव में सरयू घाट पर जलते उनके दीप जहां भगवान राम के चरणों में श्रद्धा निवेदित करते हैं, वहीं यह दीप अपने घर पर जलाकर वे मां लक्ष्मी से सुखमय जीवन की कामना भी करते हैं।
माटी कला बोर्ड के गठन से भी सरकार मिट्टी का कार्य करने वाले कुम्हारों को बढ़ावा दे रही है। मिट्टी के दीये से रामनगरी को रोशन करने के पीछे स्वदेशी का भी संदेश छिपा है। साथ ही एक पिछड़े तबके को रोजगार भी मिल रहा है।
कारीगरों का कहना है कि दीपोत्सव ने उन्हें संजीवनी प्रदान की है। दीपोत्सव के मद्देनजर 40 कुम्हारों के घर में साढ़े छह लाख दिये तैयार हो गए हैं। इन्हें 15 दिन में बनाया गया है।
अभी दीये इनके घर पर ही रखे हैं। 27 सितंबर से इनको एकत्र किया जाएगा। साथ ही इन कुम्हारों को जल्द ही और दीये बनाने का ऑर्डर मिलने की संभावना है।
जयसिंहपुर के कुम्हार रामनवमी कहते हैं कि दीपोत्सव ने उन्हें संजीवनी देने का काम किया है। उनके बनाए दीये शुद्ध मिट्टी से बने होते हैं। दीपोत्सव के लिए 20 हजार दीये बनाने हैं।
कार्तिक मास में दीपोत्सव के मद्देनजर मासिक आय 10 से 15 हजार के करीब हो जाती है। इस मास में योगी सरकार हमारे लिए अधिक खुशियां ले आती हैं।
पुष्पा देवी को 10 हजार दीप बनाने का कार्य मिला है। वे कहती हैं कि इसके लिए कुछ महिलाओं को साथ जोड़ा है। दीपोत्सव से हम सभी के घर में प्रकाश उत्सव मनाया जाता है।
हमारी सूनी दिवाली को उजियारा करने में दीपोत्सव का बड़ा योगदान है। दीपों से होने वाली आय से घर में खुशियां आ जाती हैं। सरकार यह दीपोत्सव हमेशा करती रहे।
जयसिंह पुर गांव के ही विनोद कुमार कहते हैं कि बाबू, हमें काम भी मिल रहा है। इससे हमारी आजीविका भी रास्ते पर आती है। कुम्हार बबलू प्रजापति के मुताबिक उन्हें 15 हजार दीये बनाने का ऑर्डर मिला है।
मिट्टी के दीये बनाने वालीं रेनू देवी भी सरकार की आस्था के साथ रोजगार को जोड़ने की इस पहल की सराहना करती हैं। वे कहती हैं कि सरकार ने मिट्टी, कुम्हार, दीपोत्सव को संस्कृति से जोड़कर अनुपम बना दिया।