तो उनके ऋण की धनराशि से बीमा प्रीमियम की धनराशि स्वत: कट जाती हैं और उनके फसल का बीमा हो जाता हैं। जो किसान ऋण नहीं लेते हैं ऐसे किसान स्वैच्छिक आधार पर प्रीमियम का भुगतान कर अपनी फसल का बीमा करा सकते हैं।
फसल बीमा योजना की समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि खरीफ की फसल के अंतर्गत धान, ज्वार, मक्का, अरहर, उरद फसले उक्त बीमा योजना के तहत अक्षादित हैं।
बताया कि कुल देय प्रीमियम 21 फीसदी की धनराशि का 15 फीसदी भाग उत्तर प्रदेश एवं भारत सरकार से संयुक्त रूप से बीमा कंपनी को भुगतान किया जाता हैं। मात्र 06 प्रतिशत की धनराशि किसान को प्रीमियम के रूप में जमा करना होता हैं। मुख्य विकास अधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने पिछले साल की स्थिति के बारे में जानकारी दी।
बैठक में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अविनाश राय, उप निदेशक कृषि टीपी चौधरी, जिला कृषि अधिकारी राजेश कुमार यादव, सचिव जिला सहकारी बैंक दिवाकर सिंह, सहायक आयुक्त सहकारिता एवं सहायक निबंधक एनके गुप्ता, एलडीएम ओपी शुक्ला उपस्थित थे।