कृषि क्षेत्र और अन्नदाता पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है, तभी देश की तरक्की संभव है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय को और ज्यादा तवज्जो दी जानी चाहिए। कृषि क्षेत्र की खराब स्थिति और उससे जुड़े लोगों का खराब जीवन स्तर को देश के लिए बुरा संकेत है। आखिर जिस देश की बड़ी आबादी खेती-किसानी से जुड़ी हो, उस क्षेत्र की उपेक्षा क्यों की जा रही है?
अमर उजाला ने सोमवार को कृषि विवि के गंगा छात्रावास में कैंपस अड्डा आयोजित किया जिसमें सीनियर छात्रों ने बेबाकी से अपनी राय रखी। आरक्षण व्यवस्था के कारण प्रतिभाओं में पैदा हो रही हताशा को दूर करने के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने की मांग बुलंद की गई।
जनप्रतिनिधि सरल, सहज, विनम्र और मिलनसार हो जिससे कि जनता अपनी बात उसके सामने बिना किसी हिचक के रख सके। एक छात्र ने कहा कि यातायात व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है, इसमें तत्काल सुधार करने की जरूरत है। किसी भी प्रदेश के विकास के मुख्य कारकों में यातायात व्यवस्था शामिल है लेकिन अपने यहां तो नजरअंदाज किया जा रहा है।
आरक्षण पर बोलते हुए एक छात्र ने कुछ यूं अपना तर्क रखा, ‘जाति के आधार पर आरक्षण देना कतई न्यायसंगत नहीं है। आरक्षण के दायरे से बाहर तमाम जातियां ऐसी हैं जो कि बेहद गरीब है लेकिन उनको अवसर नहीं मिल पा रहा है। आरक्षण आर्थिक आधार पर किया जाए।’ भ्रष्टाचार को लेकर समूचा तंत्र छात्रों के निशाने पर रहा।
एक छात्र ने कहा कि भ्रष्टाचार ने विकास के पहिया को जाम कर दिया है और इसके कारण कार्य संस्कृति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। नेता ऐसा हो जो भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सके। नियुक्तियों में पारदर्शिता के अभाव ने मेधावियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
एक छात्र ने कहा कि जो भी नियुक्तियां की जाएं, उनमें पारदर्शिता और ईमानदारी होनी चाहिए। राजनीतिक दलों की ओर से घोषणापत्र में किए जा रहे वादे पर एक छात्र ने यूं अपनी राय व्यक्त की। ‘जब सियासी दलों की ओर से मुफ्त में देने की लालच दिया जाए तो तत्काल समझना चाहिए कि इससे दूरगामी फायदा नहीं होगा।
हमारे हाथों को काम चाहिए, मुफ्त के उपभोक्ता सामान नहीं।’ विकास को महत्व देने की वकालत करते हुए एक छात्र ने कहा कि राजनीति की नहीं, सिर्फ विकास करने वाला दल और नेता हमें चाहिए। एक छात्र ने कहा कि जातिगत भावना से ऊपर उठकर मतदान करना है।