अयोध्या विवाद के सौहार्द्रपूर्ण सुलह समाधान की मुहिम को अंतिम चरण में रविवार को तगड़ा झटका लगा। बैठक में मुस्लिम पक्ष से सुलह समझौते पर सवाल खड़ा करते हुए मुहिम को खारिज करने तक की बात हुई। निर्मोही अखाड़े के वकील रिपोर्ट सौंपने से पीछे हटे तो कमिश्नर से मुलाकात का कार्यक्रम टाल दिया गया। अब छह नवंबर की बैठक में दस हजार हस्ताक्षरित पत्रक सौंपे जाने का फैसला लिया गया है।
पूर्व न्यायाधीश पलोक बसु के नेतृत्व में लगभग छह वर्ष से अयोध्या विवाद के सौहार्द्रपूर्ण समाधान की मुहिम चलाई जा रही है। बीते माह अभियान के तहत दस हजार पत्रक जमा होने के बाद रविवार की बैठक में कमिश्नर को सौंपने का निर्णय लिया गया था।
बैठक में चर्चा के बाद सभी पैनलों ने रिपोर्ट सौंप दी लेकिन निर्मोही अखाड़े के वकील रणजीत लाल वर्मा ने रिपोर्ट सौंपने से इंकार कर दिया। इसके बाद कमिश्नर से मुलाकात का कार्यक्रम टाल दिया गया। निर्णय लिया गया कि किसी दूसरे पैनल से रिपोर्ट तैयार करवा कर छह नवंबर की बैठक के बाद दस हजार पत्रक कमिश्नर को सौंपे जाएं।
बैठक में मुस्लिम पक्ष के लोगों द्वारा सुलह समझौता मुहिम पर सवाल भी खड़े किए गए। मुस्लिम पक्ष के लोगों ने पूर्व न्यायाधीश पलोक बसु से मुद्दे के सुलझ जाने के बाद काशी व मथुरा का मुद्दा नहीं उठने की गारंटी मांगी।
कुछ लोगों ने सुलह समझौते के हस्ताक्षरित पत्रक को भी सिरे से खारिज करते हुए कोर्ट से ही हल की बात कही। बैठक की अध्यक्षता महंत जन्मेजय शरण ने की। बैठक में पूर्व न्यायाधीश पलोक बसु, मंजर मेंहदी, शोभा मित्रा, राम टहल शरण वेदांती, वर्ल्ड सूफी काउंसिल के चेयरमैन जिलानी, सादिक अली, फरीद सलमानी, गुलशन बिंदू, मो. इकबाल, रियाज अहमद, महंत रामकृपाल दास, शोएब खान, मो. इस्लाम, लियाकत अली, नागा रामलखन दास आदि मौजूद रहे।