अयोध्या। गरीबों का सहारा बने परिषदीय स्कूलों को जीवंत करने के लिए सरकार भले ही तमाम हथकंडे अपना रही है, मगर सिस्टम की खामियों व विभाग के ढुलमुल रवैये से सपने साकार होते नहीं दिख रहे हैं।
इन्हीं खामियों की भेंट चढ़ रहे हैं अंग्रेजी माध्यम के चयनित स्कूल। पिछला साल बच्चे, शिक्षक व संसाधनों का इंतजार करते गुजर गया, कमोवेश यही स्थिति इस बार भी उत्पन्न हो रही है। इससे अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ाई सपना बनता जा रहा है।
छह से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को बेहतर तालीम देने के मकसद से जिले में 2097 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर से बच्चे लगातार यहां से दूरी बना रहे हैं।
मौजूदा समय में ये स्कूल सिर्फ गरीबों का ही सहारा बनकर रह गए हैं। मध्यम वर्गीय लोग भी अपने बच्चों को यहां भेजना मुनासिब नहीं समझते।
जबकि कान्वेंट स्कूलों में हर समय दाखिले की होड़ लगी रहती है। इसी खाई को मिटाने के लिए सरकार ने इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई शुरू कराने की मंशा जाहिर की।
अब तक कुल तीन चरणों में 201 स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में चुना। मंशा थी कि अधिक छात्र संख्या के स्कूलों को चुना जाए, उनमें बेहतर पहुंच मार्ग, फर्नीचर, बिजली, पानी सहित तमाम मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम हो और अच्छे शिक्षकों की तैनाती हो सके।
मगर सिस्टम की नाकामियों व विभागीय अधिकारियों की उदासीनता से सरकार की मंशा पूर्ण होती प्रतीत नहीं हो रही है। इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों का चयन ही किसी किले को जीतने से कम नहीं है।
गत वर्ष सालभर शिक्षकों का रोना रहा, कई बार प्रक्रियाएं पूर्ण करने के बाद भी शिक्षकों ने यहां जॉइन नहीं किया। इस बार 139 स्कूलों को और चयनित किया गया है। इसमें भी स्थिति कमोवेश गत वर्ष की भांति ही प्रतीत हो रही है।
35 प्रतिशत आवेदकों ने भी नहीं दिया साक्षात्कार
इन स्कूलों में तैनाती के लिए 1228 शिक्षकों ने आवेदन किया था। जिनकी बीते छह जुलाई को लिखित परीक्षा कराई गई तो 1115 उपस्थित हुए।
बीते दस जुलाई से इनको साक्षात्कार के लिए बुलाया गया तो करीब 413 शिक्षक ही उपस्थित हुए, जो कुल संख्या का 35 फीसदी भी नहीं है। अब या तो बिना साक्षात्कार के ही इन शिक्षकों को तैनाती दी जाए अन्यथा स्थिति और दयनीय होगी।
तैनाती की अनिवार्यता भी है दूरी का एक कारण
इस बार विभाग ने फेरबदल करते हुए ये अनिवार्य किया कि जो शिक्षक साक्षात्कार देगा, उसे काउंसलिंग के बाद जो विद्यालय एलाट होगा, वहां पदभार ग्रहण करना होगा अन्यथा की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जबकि आवेदकों में से अधिकांश ने इस प्रक्रिया के साथ ही अपना स्थानांतरण भी साधा था, जो फलीभूत होता प्रतीत नहीं हुआ तो शिक्षकों ने साक्षात्कार ने किनारा कस लिया। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अभी 40 किमी दूरी तय करके शिक्षण कार्य करते हैं, यदि अंग्रेजी माध्यम स्कूल में तैनाती मिली तो इससे भी अधिक दूरी पर तबादला हो जाएगा। इससे दिक्कत होगी।
शिक्षक नेता बोले- मानकों की हुई अनदेखी
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के नेताओं का आरोप है कि स्कूल चयन से लेकर शिक्षक चयन प्रक्रिया तक में मानकों की अनदेखी की गई है। चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए भी कुछ स्कूलों का चयन किया गया है। जिन स्कूलों में कम छात्र संख्या है और संसाधनों का अभाव है, उनका चयन औचित्य विहीन है।
कुल आवेदकों में से बहुत कम शिक्षकों ने ही साक्षात्कार दिया है। ये प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शासन के निर्देश पर रिक्त पदों के लिए अग्रिम कार्रवाई कराई जाएगी।
-अमिता सिंह, बीएसए