अयोध्या में रविवार को स्नान घाट में पितरों को पिंडदान देते लोग ।
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पितरों को तिलांजलि और पिंडदान से तर्पण देने का कार्य शुरू हो गया। पखवारे भर चलने वाले कार्यक्रम में आस्थावान सनातनी पूर्वजों को जमथरा, गुप्तार घाट, अयोध्या, भरत कुंड, मंगलसी, दिलासीगंज में नदी तट पवित्र सरोवरों और घरों में जल-तिलांजलि देकर सामर्थ्य के अनुसार पितरों का तर्पण कर रहे हैं।
स्वर्गवासी माता-पिता, दादा-दादी, सास-श्वसुर के लिए प्रतिदिन भोजन निकाल कर उसे कौओं, गायों अथवा कुत्तों को खिला रहे हैं। पूड़ी, सब्जी, खीर की हवन हवन में आहुति देकर उसे अग्निदेव से पितरों तक पहुंचाने का निवेदन कर रहे हैं।
पितृपक्ष का आरंभ शनिवार से हुआ है। माता-पिता से रहित पुत्र, बहू पितृपक्ष भर सुबह स्नान करने के बाद भीगा कपड़ा पहनकर उन्हें तिलांजलि दे रहे हैं। ड्योढ़ी के पास रहने वाली चंद्रकांती मिश्रा कहती हैं कि वह अपने सास-श्वसुर के साथ ही अपने पिता को भी तिलांजलि दे रही हैं।
मातृनवमी को सास के नाम से महिला को तो पितृ नवमी पर श्वसुर व पिता के नाम पर भोजन कराएंगी। उनके नाम पर एक खुराक भोजन दान करेंगी। पितरों तक भोजन पहुंचाने के लिए प्रतिदिन कौओं, गाय और कुत्ते को भोजन खिलाया जा रहा है।
पितृपक्ष के आखिरी दिन गुड़-घी, पूड़ी-खीर, पूड़ी-सब्जी की आहुति डाली जायेगी। पितरों से तर्पण के साथ कुशल मंगल का आशीर्वाद मांगते हुए उनसे स्वर्गलोक में वापस जाने का निवेदन किया जाएगा।