मवई। ब्लॉक मवई के लखनीपुर से निकली रामायणकालीन तमसा नदी के आंचल में वर्षों बाद जल ही जल दिखाई दे रहा है, यह तमसा के जीर्णोद्धार से संभव हुआ है।
लोगों को उम्मीद है कि मंडलायुक्त और जिलाधिकारी के निर्देशों पर कार्य तेजी से हुआ तो जल्द ही कल्याणी नदी से जुड़ने के बाद तमसा बहती हुई भी नजर आ सकेगी।
जिले में 155 किलोमीटर की लंबाई में फैली तमसा को जीवनदान देने की पहल पूर्व जिलाधिकारी डॉ. अनिल पाठक और मनरेगा उपायुक्त नागेंद्र मोहनराम त्रिपाठी द्वारा किया गया।
जिसके बाद मवई में उद्गम स्थल लखनीपुर से लेकर अंबेडकरनगर की सीमा तक तमसा की खुदाई का कार्य पूर्ण हुआ। जिसमें अब बारिश शुरू होते ही जल ही जल दिखाई दे रहा है।
मनरेगा के तकनीकी सहायक आशीष तिवारी की माने तो तमसा नदी में जितना जल एकत्र है, उतना करीब 25 सौ तालाब खोदवाने के बाद होता।
बताया कि सरकार की जो वर्षा जल संचयन की मंशा है उसमें तमसा चार चांद लगा रही है। बताया कि तमसा मां में अविरल जल धारा की शुरुआत जल्द ही हो जाएगी जब वो कल्याणी नदी से जुड़ जाएगी।
जिलाधिकारी और मंडलायुक्त ने वर्षा जल संचयन कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान तमसा उद्गम स्थल पर वर्षा शुरू होने से पहले कल्याणी नदी से जोड़ने और शारदा सहायक नहर के नीचे बने होल को साफ कराने का निर्देश दिया था लेकिन अभी तक सिंचाई विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का कार्य नहीं किया गया।
जिसकी वजह से तमसा जल धारा के रूप में बदल नहीं पाई है। मनरेगा के उपायुक्त नागेंद्र मोहनराम त्रिपाठी ने बताया कि तमसा को अविरल जल धारा के स्वरूप में लाने के लिए संकल्पबद्ध है।
कहा कि तमसा जीर्णोद्धार से वर्षा जल संचयन में बड़ी मदद मिलेगी, जिससे निश्चित तौर पर भूगर्भ जल का स्तर ऊपर उठेगा। बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर जल्द ही नहर के नीचे की सिल्ट साफ कराई जाएगी।